लोकसभा चुनाव 2019 : नेतृत्व का सशक्त होना राष्ट्र के लिए हितकर

मै न तो किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्य हूॅ न ही किसी राजनीतिक पार्टी का पक्षधर और न ही किसी पार्टी विशेष के पक्ष मे अपील करने वाला नागरिक और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का फण्ड लेकर उसके लिए माहौल बनाने वाला आई टी वर्कर मै केवल और केवल आपने मन के भाव को लिखने का प्रयास कर रहा हूॅ ।

सर्वप्रथम तो मै यह कहना चाहता हू कि बीसवी सदी यदि बंदूक तोप और युद्ध से पहचानी जाती है तो इक्कीसवी सदी सोशलमीडिया , कलम और विचार क्रांति से पहचानी जायेगी, इसलिए सोशल मीडिया पर लिखे को पढने की आदत बनाइए और फिर सबको पढने के बाद निष्कर्ष स्वयं ही निकालिए ।

अशक्त  (शक्तिहीन ) होने से पहले सशक्त  ( शक्तिशाली ) के हाथों मे सत्ता सौप देनी चाहिए,इससे प्रजा के अन्दर शक्ति और उत्साह बना रहता है। सच तो यह है कि अशक्त होने के बाद सत्ता हस्तांतरण प्रजा के अन्दर विश्वास नहीं विवशता का भाव संचार करता है,इससे प्रजा नए राजा की योग्‍यता के प्रति शंकित बनी रहती है,प्रजा तक बिना बोले यह संकेत पहुंच जाता है वर्तमान राजा को स्वयं की शक्ति पर विश्वास नहीं है। इन बातो को पढ़कर आपके मन मे वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य के सशक्त और अशक्त की छवि आपकी आखो और मस्तिष्क मे अवश्य आ रही होगी इसलिए सशक्त राष्ट्र के लिए सशक्त नेतृत्व को अवश्य चुनिए जो आपको सशक्त लगे प्रजा के लिए कल्याणकारी हो सुनो सबकी करो अपने मन की ।

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