ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम से अतिरिक्त यूरेनियम और भारी जल (हैवी वॉटर) का निर्यात रोक देगा। 2015 के परमाणु समझौते के तहत इसकी सहमति बनी थी। साथ ही उन्होंने बृहद यूरेनियम संवर्धन शुरू करने से पहले समझौते में नई शर्तों के लिए 60 दिन की समय सीमा भी तय की है। हसन रूहानी का राष्ट्र के नाम संबोधन इस ऐतिहासिक समझौते से अलग होने के अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के फैसले की वर्षगांठ के मौके पर आया है।
ईरान के अपने परमाणु कार्यक्रम सीमित करने के बदले में 2015 के इस समझौते के तहत उस पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया गया था। अमेरिका के इस सौदे से हटने के बाद उसने ईरान पर अशक्त करने वाले प्रतिबंध फिर से लगा दिए थे जिससे गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया था। ईरान ने अपने फैसले के बारे में ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, जर्मनी और यूरोपीय संघ के राजदूतों के जरिए इन देश के नेताओं को पत्र भेजा। यह सब परमाणु सौदे में हस्ताक्षरकर्ता हैं और इसको समर्थन देना जारी रखा हुआ है। रूस को भी एक पत्र दिया गया। रूहानी ने यह भी कहा कि अगर 50 दिनों में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो ईरान अपनी अरक हैवी वॉटर परमाणु भट्टी को फिर से बनाने के चीन की अगुवाई में हो रहे प्रयास को रोक देगा। ईरान ने 2015 में वैश्विक ताकतों के साथ यह समझौता किया था। पश्चिमी सरकारों को लंबे समय से यह डर था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के जरिए परमाणु हथियार विकसित कर सकता है। ईरान हमेशा से कहता रहा है कि उसके कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसदों के लिए है। सौदे की शर्तों के तहत ईरान 300 किलोग्राम से अधिक कम संवर्धित यूरेनियम नहीं जमा कर सकता।
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