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तत्सम और तद्भव शब्द की परिभाषा,पहचानने के नियम और उदहारण - Tatsam Tadbhav

तत्सम शब्द (Tatsam Shabd) : तत्सम दो शब्दों से मिलकर बना है – तत +सम , जिसका अर्थ होता है ज्यों का त्यों। जिन शब्दों को संस्कृत से बिना...

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समयसूचक AM और PM का उदगम ।।


समयसूचक AM और PM का उद्गमस्थल भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है :
AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian)
PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian)

एंटी यानि पहले, लेकिन किसके? 
पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके?
यह कभी साफ नहीं किया गया, क्योंकि यह चुराये गये शब्द का लघुतम रूप था।
अध्ययन करने से ज्ञात हुआ और हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियों में उड़ा दिया और अब, सब कुछ साफ-साफ दृष्टिगत है।
कैसे? 
देखिये...
AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya
PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya

सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसी को गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नहीं इंगित करते जो कि वास्तव में है। 
आरोहणम् मार्तण्डस्य Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)।
पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ढलाव।
दिन के बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)।
बारह के बाद सूर्य का अवसान/ ढलाव होता है - 'पतनम मार्तण्डस्य' (PM)।
पश्चिम के प्रभाव में रमे हुए और पश्चिमी शिक्षा पाए कुछ लोगों को भ्रम हुआ कि समस्त वैज्ञानिकता पश्चिम जगत की देन है।

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अल्बर्ट आइंनस्टाइन के बारे में रोचक तथ्य ।।

1. जब आइंस्टाइन का जन्म हुआ तब इनका सिर बहुत बड़ा था और इन्होंने 4 साल की उम्र तक बोलना भी शुरू नही किया था। मगर एक दिन जब 4 साल के आइंनस्टाइन अपने माता पिता के साथ रात के खाने पर बैठे थे तो उन्होने अपनी चार साल की चुप्पी तोडते हुए कहा -‘shoop बहुत गर्म है ‘। अपने बेटे के इस तरह से चार साल बाद एकदम बोलने से आइंनस्टाइन के माता-पिता हैरान हो गए।

2. आइंनस्टाइन समुद्री यात्रा करते समय और violin बजाते समय मोजे (जुराबे )पहनने पसंद नही करते थे।

3. जब आइंस्टाइन प्रिंसटन यूनिव्हर्सिटी में कार्यरत थे तो एक दिन university से घर वापस आते समय वे अपने घर का पता ही भूल गए। हालांकि प्रिंसटन के ज्यादातर लोग आइंस्टाइन को पहचानते थे, किंतु जिस texy में वे बैठे थे उसका driver उन्हें नहीं पहचानता था। आइंस्टाइन ने driver से कहा, “क्या तुम्हें आइंस्टाइन का पता मालूम है?” driver ने जवाब दिया, “प्रिंसटन में भला कौन उनका पता नहीं जानेगा? यदि आप उनसे मिलना चाहते हैं तो मैं आपको उनके घर तक पहुँचा सकता हूँ।” तब आइंस्टीन ने driver को बताया कि वे खुद ही आइंस्टाइन हैं और अपने घर का पता भूल गए हैं। यह जानकर driver ने उन्हें उनके घर तक पहुँचाया और आइंस्टाइन के बार-बार आग्रह के बावजूद भी, texy का भाड़ा भी नहीं लिया।

4. आइन्स्टीन ने एक बार कहा – “बचपन में मेरे पैर के अंगूठे से मेरे मोजों में छेद हो जाते थे इसलिए मैंने मोजे पहनना बंद कर दिया”।

5. कैलटेक (कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) ने अलबर्ट आइंस्टाइन को एक समारोह में आमंत्रित किया। आइंस्टाइन अपनी पत्नी के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए। उन्होंने माउन्ट विल्सन पर स्थित अन्तरिक्ष वेधशाला भी देखी। उस वेधशाला में उस समय तक बनी दुनिया की सबसे बड़ी अन्तरिक्ष दूरबीन स्थापित थी। इतनी बड़ी दूरबीन को देखने के बाद श्रीमती आइंस्टाइन ने वेधशाला के प्रभारी से पूछा – “इतनी बड़ी दूरबीन से आप क्या देखते हैं?”प्रभारी को यह लगा कि श्रीमती आइंस्टाइन का खगोलशास्त्रीय ज्ञान कुछ कम है। उसने बड़े रौब से उत्तर दिया – “इससे हम ब्रम्हांड के रहस्यों का पता लगाते हैं।” “बड़ी अजीब बात है। मेरे पति तो यह सब उनको मिली चिठ्ठियों के लिफाफों पर ही कर लेते हैं” – श्रीमती आइंस्टाइन ने कहा।

6. नाजी गतिविधियों के कारण आइंस्टाइन को जर्मनी छोड़कर अमेरिका में शरण लेनी पड़ी। उन्हें बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों ने अपने यहाँ आचार्य का पद देने के लिए निमंत्रित किया लेकिन आइंस्टाइन ने प्रिंसटन विश्वविद्यालय को उसके शांत बौद्धिक वातावरण के कारण चुन लिया। पहली बार प्रिंसटन पहुँचने पर वहां के प्रशासनिक अधिकारी ने आइंस्टाइन से कहा – “आप प्रयोग के लिए आवश्यक उपकरणों की सूची दे दें ताकि आपके कार्य के लिए उन्हें जल्दी ही उपलब्ध कराया जा सके।”आइंस्टाइन ने सहजता से कहा – “आप मुझे केवल एक ब्लैकबोर्ड, कुछ चाक, कागज़ और पेन्सिल दे दीजिये।” यह सुनकर अधिकारी हैरान हो गया। इससे पहले कि वह कुछ और कहता, आइंस्टाइन ने कहा – “और एक बड़ी टोकरी भी मंगा लीजिये क्योंकि अपना काम करते समय मैं बहुत सारी गलतियाँ भी करता हूँ और छोटी टोकरी बहुत जल्दी रद्दी से भर जाती है।”

7. जब लोग आइंस्टाइन से उनकी प्रयोगशाला के बारे में पूछते थे तो वे केवल अपने सर की ओर इशारा करके मुस्कुरा देते थे। एक वैज्ञानिक ने उनसे उनके सबसे प्रिय उपकरण के बारे में पूछा तो आइन्स्टीन ने उसे अपना फाउंटन पेन दिखाया। उनका दिमाग उनकी प्रयोगशाला थी और फाउंटन पेन उनका उपकरण।

8. आइंनस्टाइन की यादआसत कुछ ज्यादा अच्छी नही थी .उन्हें Dates और Phone numbers याद रखने में problem होती थी.यहाँ तक कि उन्हे खुद का नंम्बर याद नही रहता था .

9. आइंस्टाइन को सिगार पीना बहुत पसंद था। इतना कि एक बार वह नौका विहार के दौरान नदी में गिर गए और बाहर निकले तो पूरी तरह भीग चुके थे, लेकिन इस दौरान भी उन्होंने बडी हिफाजत से अपने पाइप को बचाए रखा। मॉन्ट्रियल स्मोकर्स क्लब के वह सदस्य थे। एक बार उन्होंने कहा था, सिगार पीने से दुनियादारी से जुडे या व्यावहारिक मामलों में सही नतीजों तक पहुंचने और शांत रह पाने में बहुत मदद मिलती है।

10. आइंन्स्टाइन का जन्मदिन 14 मार्च को पूरी दुनिया में ‘जीनियस डे’ के रूप में मनाया जाता है।

11. आइंनस्टाइन बढ़ीया काम करने के लिए रात को 10 घंटे तक सोते थे
12. वह बहुत ही अयोग्य संगीतकार थे। चार्ली चैप्लिन की जीवनी में एक जगह आइंस्टाइन के संगीत प्रेम का उल्लेख आता है। वह अपनी किचन में जाकर वॉयलिन बजाते थे, खाली समय में मोजार्ट का संगीत सुनते थे, यानी संगीत से उन्हें दिली लगाव था और बचपन से बुढापे तक एक वॉयलिन उनके पास हमेशा रहा। लेकिन संगीत का ज्ञान उन्हें इतना कम था कि कई बार तो धुरंधरों के बीच में बैठकर भी बेसुरा संगीत आत्मविश्वास के साथ बजाते थे और लोगों की ओर दाद देने के लिए देखते। बाकी लोग हंसते, लेकिन उनकी पत्नी हमेशा उनकी हौसलाअफजाई करतीं।

13. आइन्स्टीन के एक सहकर्मी ने उनसे उनका टेलीफोन नंबर पूछा। आइन्स्टीन पास रखी टेलीफोन डायरेक्टरी में अपना नंबर ढूँढने लगे। सहकर्मी चकित होकर बोला “आपको अपना खुद का टेलीफोन = नंबर भी याद नहीं है?" "नहीं" - आइन्स्टीन बोले- "किसी ऐसी चीज़ को मैं भला क्यों याद रखूँ जो मुझे किताब में ढूँढने से मिल जाती है"। आइन्स्टीन कहा करते थे कि वे कोई भी ऐसी चीज़ याद नहीं रखते जिसे दो मिनट में ही ढूंढा जा सकता हो ।

14. महान वैज्ञानिक की स्मरण शक्ति बहुत खराब थी । व्यावहारिक दुनिया की बहुत सी बातें वे अक्सरह भूल जाया करते थे। मसलन बच्चों का बर्थ डे या फिर कोई भी खास दिन । एक बार तो अपनी गर्ल फ्रेंड का बर्थडे भी भूल गए। अगले दिन उन्होंने एक पत्र लिखकर इसकी माफी मांगी। उसमें लिखा- स्वीटहार्ट, पहले तो मेरी बधाइयां स्वीकारो अपने बीत चुके बर्थ डे के लिए...जो कल था और एक बार फिर मैं उसे भूल गया।

15. एक बार आइनस्टाइन के गणित के प्रोफैसर ने उन्हे 'Lazy dog' तक कह दिया था क्योकि आइनस्टाइन पढ़ाई में बहुत कमजोर थे।

16. आइनस्टाइन के मन के अंदर विज्ञान के प्रति रूचि तब पैदा बुई जब उनकी उम्र पाँच साल थी और उनके पिता ने उन्हें एक Compass लाकर दिया।

17. वैसे तो आइनस्टाइन की सभी खोजे प्रसिद्ध है. मगर उनकी सबसे ज्यादा प्रसिद्धी तब हुई जब उन्होने पुंज-उर्जा तुल्य (E=mc2) पर पत्र प्रकाशित किया। इसका मतलब ईकाई पुंज को अगर प्रकाश की गति के वर्ग के साथ गुणा कर दिया जाए तो उससे उतनी ही उर्जा प्राप्त होती है। इस से प्रेरित होकर ही नए वैज्ञानिकों ने प्रमाणु बम पर शोध शुरु कर दिए थे. मगर आइनस्टाइन जिन्दगी भर इस गलत प्रयोग के विरूद्ध थे।

18. एक बार आइनस्टाइन को उनके अजीब व्यवहार के कारण स्कूल से निकाल दिया गया और वह 17 साल की उम्र में college entrace के सारे Exams में गणित और विज्ञान को छोड़कर सभी विषयो में फेल हो गए थे।
19. ऊपरी चित्र तब लिया गया था जब 1941 में आइनस्टाइन पार्टी पूरी करके आ रहे थे और उनसे एक फोटोग्राफर ने मुसकराते हुए फोटो खिचवाने का आग्रह किया। आइनस्टाइन जो पहले ही थके हुए थे अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपना फोटो दिया। फोटोग्राफर ने यह यादगार लम्हा कैद कर लिया।

20. 1952 में अमरीका ने आइनस्टाइन को इजराइल का राष्ट्रपति बनने की पेशकश की परन्तु आइनस्टाइन ने यह पेशकश यह कह कर ठुकरा दी कि वह राजनीती के लिए नही बने। इसका कारण यह है कि आईंस्टाइन एक यहुदी थे और इजराइल एक यहुदी देश।

21. एक दिन अल्बर्ट आइंस्टाइन भाषण देने जा रहे थे तो रास्ते में उनके ड्राइव्हर ने कहा कि आपका भाषण मैं इतनी बार सुन चुका हूँ कि लोगों के सामने मैं ही आपका भाषण दे सकता हूँ। यह कहकर कि ‘ठीक है आज तुम्हीं भाषण देना’ आइंस्टाइन ने ड्राइव्हर की पोशाक पहन कर उसका स्थान ले लिया और अपना स्थान ड्राइव्हर को दे दिया।

भाषण हॉल में ड्राइव्हर ने सचमुच, आइंस्टाइन के जैसे ही, धुआँधार भाषण दिया। भाषण देने के बाद जब लोगों ने प्रश्न पूछने शूरू किए और ड्राइव्हर पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब भी सही दिए। किन्तु किसी एक ने ऐसा कठिन प्रश्न पूछ लिया कि ड्राइव्हर को उसका उत्तर नहीं पता था। इस पर ड्राइव्हर ने कहा, “अरे इस प्रश्न का जवाब तो इतना सरल है कि मेरा ड्राइव्हर बता देगा।” ऐसा कहकर उसने ड्राइव्हर वाली पोशाक पहने आइंस्टाइन को जवाब देने के लिए खड़ा कर दिया।

22. एक बार आइंस्टाइन प्रिंसटन से कहीं जाने के लिए ट्रेन से सफर कर रहे थे। जब टिकट चेकर उनके पास आया तो वे अपनी टिकट ढ़ूँढ़ने के लिए जेबें टटोलने लगे। जेब में टिकट के न मिलने पर उन्होंने अपने सूटकेस को चेक किया। वहाँ भी टिकट को नदारद पाकर अपनी सीट के आस-पास खोजने लगे। यह देखकर चेकर ने कहा कि यदि टिकट गुम हो गई है तो कोई बात नहीं, वह उन्हें अच्छी प्रकार से पहचानता है और उसे विश्वास है कि टिकट जरूर खरीदी गई होगी।चेकर जब बोगी के सभी लोगों का टिकट चेक करके वापस जा रहा था तो उसने देखा कि आइंस्टाइन अपनी सीट के नीचे टिकट ढ़ूँढ़ रहे हैं। तब चेकर फिर से उन्हे कहा कि वे टिकट के लिए परेशान न हों, उनसे टिकट नहीं माँगा जाएगा। चेकर की बातें सुनकर आइंस्टाइन ने कहा, “पर टिकट के बिना मुझे पता कैसे चलेगा कि मैं जा कहाँ रहा हूँ?”

23. अल्बर्ट आइन्स्टीन के प्रेम के किस्सो की 1 लम्बी list है। उनकी मृत्यु के 20 साल बाद उनकी सौतेली बेटी ने उनके 1500 पत्र प्रकाशित किये जिनमें उनके लगभग 6 प्रेम संबंधो का खुलासा हुआ। वह अपने प्रेम संबंधो का ताजा हाल अपनी इस बेटी को चिट्ठियो में लिखा करते थे। हालाँकि कई जानकारो का कहना है कि वह 20 से भी ज्यादा प्रेम संबंधो में रहे। उनकी एक प्रेमिका मशहूर अदाकारा मर्लिन मुनरो भी थी। आइन्स्टीन की लोकप्रियता और उनकी विद्वता के चर्चे महिलाओ को उनकी ओर आकर्षित करते थे। एक बार Germany की 1 सोशलाईट जिसे वह M कहते थे, उनसे मिली और प्रेम में डूब गई। उसने आइंस्टीन पर तोहफो की बौछार कर दी। वे कुछ समय जर्मनी में साथ रहे और फिर आइंस्टीन लंडन आ गये। वह उनके पीछे लंडन आ गई। उसके बाद आइंस्टीन अमरीका चले गये। वह वहां भी पहुँच गई। उनकी ऐसी ही रूसी प्रेमिका भी थी, जिसे वह जासूस कहते थे। उसने भी आइंस्टीन के पीछे लगभग आधी दुनियां का चक्कर लगा लिया था।

24. किसी समारोह में एक महिला ने आइंस्टीन से सापेक्षता का सिद्धांत समझाने का अनुरोध किया। आइन्स्टीन ने कहा: “मैडम, एक बार मैं देहात में अपने अंधे मित्र के साथ घूम रहा था और मैंने उससे कहा कि मुझे दूध पीने की इच्छा हो रही है“। “दूध?” – मेरे मित्र ने कहा – “पीना तो मैं समझता हूँ लेकिन दूध क्या होता है?”“दूध एक सफ़ेद द्रव होता है” – मैंने जवाब दिया।

“द्रव तो मैं जानता हूँ लेकिन सफ़ेद क्या होता है?”

“सफ़ेद – जैसे हंस के पंख“।

“पंख तो मैं महसूस कर सकता हूँ लेकिन ये हंस क्या होता है?”

“एक पक्षी जिसकी गरदन मुडी सी होती है“।

“गरदन तो मैं जानता हूँ लेकिन यह मुडी सी क्या है?” “अब मेरा धैर्य जवाब देने लगा। मैंने उसकी बांह पकड़ी और सीधी तानकर कहा – “यह सीधी है!” – फ़िर मैंने उसे मोड़ दिया और कहा – “यह मुडी हुई है“।

“ओह!” – अंधे मित्र ने कहा – “अब मैं समझ गया दूध क्या होता है“।

25. जब आइन्स्टीन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे तब एक दिन एक छात्र उनके पास आया। वह बोला – “इस साल की परीक्षा में वही प्रश्न आए हैं जो पिछले साल की परीक्षा में आए थे”।

“हाँ” – आइन्स्टीन ने कहा – “लेकिन इस साल उत्तर बदल गए हैं”।

26. आइंस्टाइन की मृत्यु के बाद उनके परिवार की अनुमति के बिना उनका दिमाग निकाल लिया गया। यह अनैतिक कार्य Dr.Thomas Harvey द्वारा उनके दिमाग पर रिसर्च करने के लिए किया गया। 1975 में उनके बेटे Hans की आज्ञा से उनके दिमाग के 240 सैंपल कई वैज्ञानिकों के पास भेजे जिन्हें देखने के बाद उन्होने पाया कि उन्के दिमाग में आम इन्सान से ज्यादा cells की गिणती है।

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आइंस्टीन की ये 10 बातें आपको जीवन में दिला सकती है सफलता ।।

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का आज जन्मदिन है. उन्होंने अपने सापेक्षता के सिद्धांत (Theory of Relativity) से ब्रह्मांड के नियमों को समझाया. आइंस्टीन के इस सिद्धांत ने विज्ञान की दुनिया को बदल कर रख दिया. आइंस्टीन जितने बड़े वैज्ञानिक थे, उतने ही बड़े दार्शनिक भी थे.

उनके सिद्धांत साइंस की दुनिया के अलावा आम जिंदगी में भी कई जगह सही साबित होते हैं. आइंस्टीन ने साइंस के नियमों को समझाते हुए कई बार सफलता, असफलता, कल्पना और ज्ञान के बारे में कई ऐसी बातें कही हैं, जि‍नके आधार पर कठिनाइयों को पार कर सफलता की राह पर बढ़ा जा सकता है.

जानिए अल्बर्ट आइंस्टीन की 10 बातें जो आपके लिए सफलता के दरवाजे खोल सकती हैं

1. कल से सीखें और आज के लिए जिएं. सफल होना चाहते हैं तो जीवन में सवाल करने की आदत को कभी भी न छोड़ें.

2. हम अपनी समस्याओं को उन विचारों के साथ नहीं सुलझा सकते, जिनसे वे उपजे हों.

3. तेज होने की पहचान ज्यादा ज्ञानवान होना नहीं है बल्कि इसका मतलब कल्पना और सपने देखने की ताकत है.

4. सफलता का सबसे बड़ा स्रोत अनुभव है.

5. जो अपनी सीमाओं को जानता है, वहीं उससे आगे जाता है.

6. तर्क आपको A से B तक ले जाएगा जबकि कल्पना के सहारे आप कहीं भी जा सकते हैं.

7. जीने के दो ही तरीके हैं, पहला यह कि कुछ भी चमत्कार नहीं है और दूसरा यह कि सब कुछ चमत्कार ही है.

8. जब तुम प्रकृति को गौर से देखोगे तब कुछ भी बेहतर तरीके से समझ सकते हो.

9. किसी एक चीज को बार-बार करना और हर बार अलग परिणाम की आशा करना मूर्खता है.

10. सबसे पहले आपको खेल के नियमों को जानना चाहिए, उसके बाद ही आप दूसरों से बेहतर खेल सकते हैं.

गोपाल राठी

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सौरमन्डल से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य ।।


1. वैसे तो ब्रह्माण्ड का व्यास(Diameter)
अनंत है। लेकिन एक रिसर्च के मुताबिक यूनिवर्स का
व्यास करीब 91 अरब प्रकाश वर्ष है।

2. आकाश-गंगा की एक परिक्रमा को पूरी करने में
सूर्य को लगभग 25 करोड़ साल लगते हैं। 25 करोड़
साल की इस लम्बी अवधि को ब्रह्माण्ड-वर्ष या
कॉस्मिक-इयर (Cosmic-Year) के नाम से जाना
जाता है।

3. ब्रह्माण्ड में करीब 10 अरब- खरब तारे है। या
ज़्यादा भी हो सकते है।

4. कुछ साइंटिस्टो की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रह्मांड
का एक तारा सन् 2029 में पृथ्वी से टकराने वाला
है।

5. ब्रह्माण्ड में सूर्य से भी कई गुना बड़े कई तारे
है।

6. हमारे सौरमंडल का सबसे ऊँचा पहाड़ मंगल गृह
पर है जिसके सामने एवेरेस्ट की चोटी बहुत छोटी है।

7. एक रिपोर्ट की माने तो आज से करीब 3 अरब
साल बाद हमारी आकाशगंगा किसी और आकाशगंगा
के टकराकर नष्ट हो जाएंगी।

8. ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे कई करोड़ो गृह हो सकते
है।

9. हमारी आकाशगंगा का नाम मंदाकिनी(Milky
way) है।

10. एस्ट्रोनॉट्स की माने तो अंतरिक्ष में सुगंध
वेल्डिंग के धुँए या गर्म धातु जैसी आती है।

11. पृथ्वी से 10,000 प्रकाश वर्ष दूर एक
विशाल बादल है जो अनगिनत शराब से भरा है।

12. हमारा 90% शरीर तारो के तत्वो(Stardust)
से बना है।

13. ब्रम्हाण्ड में हर रोज़ करीब 275 मिलियन तारे
जन्म लेते है।

14. हमारा सौरमंडल को मन्दाकिनी(Milky Way)
का चक्कर लगाने में करीब 225 मिलियन साल लगते
है।

15. Dianosour के युग में 22 घंटे का दिन हुआ
करता था।

16. पृथ्वी की गति हर 100 वर्षो में घटते जा रही
है। करीब 17 मिलिसेकंद/100 वर्ष ।

17. हमारे खून के अंदर के आयरन का जन्म अरबो
साल पहले किसी तारे में अरबो किलोमीटर दूर हुआ
था।

18. हमारी पृथ्वी से 33 प्रकाश वर्ष दूर एक
exoplanet है जो पूरी तरह से जलती हुई बर्फ से
ढका हुआ है।

19. यदि आप एक ब्लैक होल में होते और अंदर से
बाहर देखते, तो आकाश के एक छोटे पैच में पूरे
ब्रह्मांड को देखने के साथ-साथ अपने सर का पिछला
हिस्सा भी देख पाते।

20. हमारी आकाशगंगा के केंद्र में बदबू रम की तरह
आती है।

21. गैलेलियो वह पहला शख्स था जिसने टेलिस्कोप
से अंतरिक्ष को अपनी आँखों से देखा था।

22. अंतरिक्ष में किसी प्रकार की कोई आवाज़ नहीं
है।

23. अगर आप ब्रह्मांड में कही से भी सफर शूरू
करेंगे और सीधा जाएंगे तो आप वापस उसी जगह पर
आ जाएंगे लेकिन आपको ब्रह्मांड का कोई दूसरा छोर
नहीं मिलेंगा।

24. काला पदार्थ(Dark Matter) वह गोंद है जो
ब्रह्मांड को जोड़े रखता है और जिसे मापा नहीं जा
सकता।

25. दो सितारों के बीच की औसत दुरी करीब 20
मिलियन मिलियन माइल्स है।


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पानी का तो कोई रंग नहीं होता फिर बारिश वाले बादल काले क्यों होते हैं ।।

आज का सामान्य ज्ञान 

आसमान में बादल होते हैं और बादल से बारिश होती है। बारिश की बूंदे जब जमीन पर आती है तो हम सबको दिखाई देती हैं। वह ट्रांसपेरेंट होती हैं। उनका अपना कोई रंग नहीं होता। सवाल यह है कि जब बरसात के पानी का कोई रंग नहीं होता तो फिर बारिश वाले बादल काले रंग के क्यों दिखाई देते हैं। 

हम सभी जानते हैं कि किसी भी वस्तु के रंग का सीधा संबंध प्रकाश से होता है। सूर्य, हमारे सौरमंडल में प्रकाश का एकमात्र स्त्रोत है। जब कोई वस्तु सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आती है तो वह जिस रंग को अवशोषित कर लेती है वह वस्तु उसी रंग की दिखाई देती है, लेकिन बादलों के मामले में ऐसा नहीं है। बारिश वाले बादलों के मामले में प्रकाश के परावर्तन अथवा प्रकाश के अवशोषण का नहीं बल्कि प्रकाश के अवरोध का सिद्धांत काम करता है।

जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य ग्रहण पड़ता है। उस समय पृथ्वी पर अंधेरा छा जाता है और सूरज काला दिखाई देता है। यह बिल्कुल वैसा ही है। जब बर्फ के छोटे-छोटे कण एक दूसरे से चिपकते जाते हैं और उनका घनत्व बढ़ता जाता है। तब सूर्य की किरणें उन्हें पारकर के पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती। इसके कारण हमें बादल काले दिखाई देते हैं। एक प्रकार से बारिश वाले बादल पृथ्वी के एक विशेष हिस्से पर ग्रहण लगा देते हैं और ग्रहण काल में ही बारिश करते हैं।

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पेट्रोल का रंग पीला, डीजल का हरा क्यों होता है, जबकि दोनों क्रूड ऑयल से बनते हैं

वर्षा के समय बादल काले क्यों दिखाई देते हैं?


सिंधु घाटी सभ्यता – महत्वपूर्ण तथ्य

1. दक्षिण एशिया के पहले शहर 2600 ईसा पूर्व के आसपास स्थापित किए गए थे। जो अब पाकिस्तान और पश्चिमी भारत में है। 
 
2. जिन लोगों ने इन शहरों का निर्माण और शासन किया, वे हड़प्पा संस्कृति या सिंधु सभ्यता से संबंधित हैं, एक ऐसी सभ्यता जो लगभग उसी समय विकसित हुई जब मिस्र और मेसोपोटामिया के प्रारंभिक शहर राज्य थे। 
 
3. यह शहरी सभ्यता बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के ऊंचे पहाड़ों से लेकर मकरान, सिंध और गुजरात के तटीय क्षेत्रों तक एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र में फैली हुई है। 
 
4. हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे बड़े शहर और छोटे शहर प्रमुख व्यापार मार्गों के साथ प्रशासनिक और अनुष्ठान केंद्रों के रूप में विकसित हुए। 
 
5. इस सभ्यता के पूर्ण शहरी चरण के दौरान, अरब की खाड़ी, पश्चिम और मध्य एशिया और प्रायद्वीपीय भारत में आसपास की संस्कृतियों के साथ व्यापार संपर्कों के प्रमाण मिले हैं। 
 
6. सिंधु घाटी सभ्यता की खोज सबसे पहले 1800 के दशक में अंग्रेजों द्वारा दर्ज की गई थी। पहला रिकॉर्ड किया गया नोट एक ब्रिटिश सेना के भगोड़े, जेम्स लुईस का था, जो 1826 में एक अमेरिकी इंजीनियर के रूप में प्रस्तुत कर रहा था.

Indus Valley Civilization – Important Facts

1. South Asia’s first cities were established around 2600 B.C. in what is now Pakistan and western India. 
 
2. The peoples who built and ruled these cities belong to the Harappan Culture or Indus Civilization, a civilization that developed at approximately the same time as the early city states of Egypt and Mesopotamia.  
 
3. This urban civilisation spread over a vast geographical region, from the high mountains of Baluchistan and Afghanistan to the coastal regions of Makran, Sindh and Gujarat. 
 
4. Large cities like Harappa and Mohenjodaro and smaller towns grew up along the major trade routes as administrative and ritual centers. 
 
5. During the full urban phase of this civilization, evidences of trade contacts have been found with the surrounding cultures in the Arabian Gulf, West and Central Asia and peninsular India. 
 
6. The discovery of the Indus Valley Civilization was first recorded in the 1800’s by the British. The first recorded note was by a British army deserter, James Lewis, who was posing as an American engineer in 1826.

जानें क्या है महिलाओं के इस्तेमाल किए जाने वाले सेनेटरी पैड का इतिहास।।

महिलाओं के पीरियड्स के दिनों में काम आने वाले पैड्स का क्या रहा है इतिहास, जानें कब और कैसे पहली बार इस्तेमाल हुए पैड।

कई साल पहले लोग पैड का नाम लेने से हिचकिचाते थे। लोग इनके बारे में सार्वजनिक बात करना तो दूर, इसे घरवालों से छुपाया करते थे। आज इतने सालों बाद भी लोग पैड को काली पॉलीथिन या पेपर में लपेटकर दुकानों से ले जाते हैं। मगर 2018 में आई फिल्म के बाद लोग अब पैड और पीरियड्स के प्रति जागरूक होने लगे हैं। महिलाएं अब इनके विषय में खुलकर बात करती हैं, इतना ही नहीं अब कई जगहों पर महिलाओं को पीरियड्स लीव भी दी जाती है।

आज के आर्टिकल में हम आपको पैड का इतिहास बताएंगे कि आखिर कैसे दुनिया में पैड की शुरुआत हुई और किस तरह पैड के प्रति जागरूकता की आवश्यकता है।

✅️ पुरुषों के लिए बनाया गए थे पैड्स -

आप शायद यह जानकर हैरान होंगे कि पैड का आविष्कार महिलाओं के लिए नहीं बल्कि पुरुषों के लिए किया गया था। माय पीरियड ब्लॉग की एक पोस्ट के मुताबिक पहली बार सेनेटरी पैड का इस्तेमाल प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान किया गया था। कहा जाता है कि फ्रांस की नर्सों मे प्रथम विश्वयुद्ध के घायल सिपाहियों के खून के बहाव को रोकने के लिए यह पैड्स बनाए थे, जब किसी सिपाही को गोली लगती या खून बहुत ज्यादा बहता तब इन पैड्स का इस्तेमाल किया जाता। इन नैपकिन को बनाने के लिए ऐसे सामानों का इस्तेमाल किया गया था जो युद्ध के समय में बड़ी आसानी से मिल जाते थे। यह पैड्स सस्ते होने के साथ-साथ डिस्पोजेबल भी थे, जिन्हें इस्तेमाल करके आसानी से डिस्पोज किया जा सकता था।

✅️ महिलाओं ने शुरू किया पैड का इस्तेमाल -

जब पुरूषों के लिए ये पैड तैयार किए जा रहे थे, उसी दौरान वहां काम कर रही महिला नर्सों ने पैड्स को अपने पीरियड्स के दिनों में भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। तब से ये मेंस्ट्रुअल पैड्स के रूप में इस्तेमाल किए जाने लगे।

हलांकि युद्ध के पहले भी महिलाएं पीरियड्स से जुड़े सामानों का इस्तेमाल करती थीं। करीब 1888 के दौरान डिस्पोजेबल पैड्स बनाए गए थे, बता दें कि 1896 में पहली बार जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने अपने पहले सेनेटरी टॉवल की शुरुआत की, जिसका नाम लिस्टर्स टॉवल रखा गया।

इन सेनेटरी प्रोडक्ट्स को रेक्टैंगल कॉटन वूल या इसी तरह के कई दूसरे फाइबर की मदद से तैयार किया गया था। उस समय में यह बेल्ट्स बहुत महंगे हुआ करते थे जिन्हें आम लोग नहीं खरीद सकते थे, इस कारण उस दौर में भी लोग पीरियड्स के दिनों में कपड़ों का इस्तेमाल करते थे।

कहा जाता है कि सन् 1900 के करीब अमेरिकी महिलाएं सेनेटरी बेल्ट का इस्तेमाल करती थीं। हालांकि ये बेल्ट बहुत महंगी होती थीं जिस कारण बहुत कम महिलाएं ही इसका इस्तेमाल कर पाती थीं।

इसके बाद 1950 आते-आते महिलाओं के लिए डिस्पोजेबल सेनेटरी बेल्ट बनाई गई, पर यह भी आम महिलाओं की पहुंच से बिल्कुल दूर थीं।

✅️ वाशेबल क्लॉथ पैड - (washable pads)

1960 के दशक में महिलाओं के बीच वॉशएबल क्लॉथ पैड का इस्तेमाल शुरू हुआ, जिसे कई देशों में महिलाएं इस्तेमाल करती थीं। यह कपड़े के बने पैड्स काफी इको फ्रेंडली थे, इसके अलावा इन्हें बार-बार यूज किया जा सकता था।

1970 के दशक में महिलाओं के पीरियड्स के लिए मैक्सी पैड्स की शुरुआत हुई, उसी दौरान 1972 में अमेरिका ने महिलाओं के सेनेटरी पैड्स के ऐड्स पर लगे ऐड बैन हटा दिया।

✅️ आज के समय में पैड -

आज बाजार में कई ब्रांड्स के सेनेटरी पैड्स मिलते हैं महिलाएं किसी भी जनरल स्टोर से इन्हें खरीद सकती हैं। बीते समय में भारत में टोम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप भी मिलने लगे हैं, हालांकि इसके बावजूद भी महिलाएं पैड्स को चुनती हैं।

हालांकि ये पैड्स अभी भी काफी महंगे हैं, जिस वजह से गांव की महिलाएं आज सेनेटरी पैड्स की जगह कपड़ा इस्तेमाल करने पर मजबूर होती हैं। इतना ही नहीं उन्हें कई इंफेक्शन से भी जूझना पड़ता है, पैड के इतने सालों पहले आविष्कार के बावजूद भी आज तक सभी महिलाओं के पास यह पहुंच नहीं पाया है।

होली से जुड़ी कुछ रोचक बातें ।।


1.👉🏻 होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।  इसी दिन से नववर्ष की शुरूआत भी हो जाती है। इसलिए होली पर्व नवसंवत और नववर्ष के आरंभ का प्रतीक है।

2.👉🏻 'होली' भारत का उमंग, उल्लास के साथ मनाने वाला सबसे प्राचीन त्योहार है।

3.👉🏻 पहले होली का नाम ' होलिका' या 'होलाका' था. साथ ही होली को आज भी 'फगुआ', 'धुलेंडी', 'दोल' के नाम से जाना जाता है।

4.👉🏻 इतिहासकारों का मानना है कि ये पर्व आर्यों में भी प्रचलित था, लेकिन अधिकतर यह पूर्वी भारत में ही मनाया जाता था। अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में इस त्योहार के बारे में लिखा हुआ है। इसमें खास तौर पर 'जैमिनी' के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र शामिल हैं। नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है।

5.👉🏻 प्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। साथ ही भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं 'मुसलमान' भी मनाते हैं।

6.👉🏻 जहांगीर का नूरजहां के साथ होली खेलने का वर्णन इतिहास में है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहांगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।

7.👉🏻 शाहजहां के समय तक होली खेलने का मुग़लिया अंदाज़ ही बदल गया था। शाहजहां के ज़माने में होली को 'ईद-ए-गुलाबी' या 'आब-ए-पाशी' (रंगों की बौछार) कहा जाता था।

8.👉🏻 मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे। वहीं हिन्दी साहित्य में कृष्ण की लीलाओं में भी होली का विस्तार रूप से वर्णन किया गया है।

9.👉🏻 संस्कृत साहित्य में होली के कई रूप हैं. जिसमें श्रीमद्भागवत महापुराण में होली को रास का वर्णन किया गया है। महाकवि सूरदास ने वसन्त एवं होली पर 78 पद लिखे हैं।

10.👉🏻 शास्त्रीय संगीत का होली से गहरा संबंध है। हालांकि ध्रुपद, धमार और ठुमरी के बिना आज भी होली अधूरी है। वहीं राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली के गानों का रंग ही अलग है।

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जब चीन के तानाशाह माओ ने गौरैया के सर्वनाश का आदेश जारी किया 📚

गौरैया को हम बचपन से जानते है लेकिन अफसोस कि गौरैया आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती हुई नजर आ रही हैं। इंसानों ने घर तो बड़े-बड़े बना लिए हैं, पर दिल उनके छोटे ही रह गए। इतनेे छोटे रह गए कि उनमें नन्हीं-सी गौरैया भी नहीं आ पा रही। आज 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस है। पहली बार वर्ष 2010 में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया था।

यह दिवस ख़ास तौर पर इसलिए मनाया जाता है ताकि गायब होती गौरैया और पक्षियों को बचाया जा सके। पहली बार संरक्षण के लिए विशेष प्रयास और जागरूकता अभियान चलाए गए थे, पर अफसोस कि वर्तमान में वे सब ठप्प पड़े हैं।

विश्व भर में गौरैया की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 5 भारत में देखने को मिलती हैं। पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले कुछ सालों में गौरैया की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। यूरोप में गौरैया संरक्षण-चिंता के विषय वाली प्रजाति बन चुकी है और ब्रिटेन में यह रेड लिस्ट में शामिल हो चुकी है।

भारत में भी लगातार इनकी संख्या घटती जा रही है। अगर हमने इसकी घटती संख्या को गंभीरता से नहीं लिया, तो वह दिन दूर नहीं, जब गौरैया हमेशा- हमेशा के लिए हमसे दूर चली जाएगी।

गौरैया के इस तरह गायब हो जाने का कारण है कि लोगों ने व्यापारिक लाभ, ईंधन और घर बनाने के लिए अंधाधुंध पेड़ों की कटाई शुरूकर दी है। कभी हमारे घर के आंगन में तो कभी मुंडेर पर फुदकती गौरैया भोर के वक्त लोगों की नींद अपनी चहचहाहट से खोला करती थी, मानो अब वो गायब सी हो चुकी है। क्योंकि उनकी वो आवाज अब कहीं गुम सी हो गई है।

पहले गांव के खेत खलिहानों में गौरैया की चहचाहाट की गूंज सुनाई पड़ती थी। लेकिन वो अब वो गुम हो गई है। गौरैया के इस तरह गायब होते जाने के कारणों की पड़ताल की जाए तो मनुष्यों की आधुनिक जीवन शैली और पर्यावरण के प्रति उदासीनता इसका सबसे बड़ा कारण नजर आती है।

अंधाधुंध कटते पेड़ और आधुनिक बनावट वाले मकानों को चलते गौरैया को अब घोंसले बनाने की जगह ही नहीं मिलती। मनुष्य इतना स्वार्थी हो चुका है कि यदि कहीं जगह भी मिलती है, तो उसे घोंसला बनाने नहीं देते।

घर या बहार थोड़ी-सी गंदगी फैलने के डर से उसके द्वारा मेहनत से जुटाया गया तिनके-तिनके का घर पल भर में उजाड़ देते हैं। कभी- कभी तो उन घोंसलो में जन्म लेने को आतुर बच्चे भी बाहर बिल्ली, कौए, चील, बाज जैसे परभक्षियों का शिकार बनते हैं।

जब चीन के तानाशाह माओ ने गौरैया के सर्वनाश का आदेश जारी किया

गौरेया से संबंधित एक वाक्या साझा करते हुए माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के शिक्षक अनिरुद्ध सूबेदार बताते है कि 1958 के समय कम्युनिस्ट चीन के तानाशाह माओ त्से तुंग ने एक अभियान प्रारम्भ किया था। जिसे "The Four Pests Campaign" के नाम से जाना जाता है।

इस स्वच्छता अभियान के अंतर्गत चूहे, मच्छर, मक्खियाँ और गौरैया के सर्वनाश का आदेश जारी किया गया। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि गौरैया पर आरोप तय किया गया था कि वह अत्यधिक फसल खा जाती है, उसे 'पूंजीवादी' और 'जनता का शत्रु' घोषित किया गया था।

उसके बाद देश भर में गौरैया को मारने की होड़ लग गयी, जो जितनी अधिक मृत गौरैया मारकर लाता उसे उतना प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाता। गौरैया को मारने का तरीका जितना विचित्र था उतना ही क्रूर भी था। सैकड़ों चीनी ढोल बजाते, थालियां-बर्तन पीटते, पेड़ों के आसपास खड़े हो जाते, संवेदनशील चिड़िया आतंकित होकर आराम करने बैठ भी नहीं पाती और तक कर गिर मर जाती।

जब गौरैयों ने पोलैंड के दूतावास में शरण ली

एक घटना इस संबंध में सुनाई जाती है जब कोई सुरक्षित स्थान न पाकर कई गौरैयों ने पोलैंड के दूतावास में शरण ली, तब वहां के अधिकारियों ने चीनी लोगों को अंदर आने की अनुमति नहीं दी। दो दिन तक चीनी बाहर ढोल पीटते रहे, दो दिन पश्चात दूतावास के लोगों को फावड़े से मृत गौरैयों को बाहर निकालना पड़ा।

इस मूर्खता का अंत तब हुआ जब 2 वर्ष पश्चात समझ आया कि गौरैया मात्र फसल नहीं उसपर लगने वाले कीड़े/इल्लियां भी खाती थी। गौरैय्या के जाने से फसल को खाने वाले कीड़ों की संख्या भयंकर रूप से बढ़ गयी, उत्पादन पहले से भी कम हो गया।

तब कहीं गौरैयों को इस जनता के शत्रु की सूची से हटाया गया। परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चीन में उस समय आये भयंकर अकाल में यह भी एक कारण था। ऐसा भी कहते हैं कि चीन को सोवियत रूस से गौरैयों आयातित करनी पड़ीं।

भारत में कहां- कहां है खतरा

भारत के बहुत-से हिस्सों में गौरैया की स्थिति बहुत चिंताजनक है। जैसे दिल्ली,उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बैंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और दूसरे शहरों में है।

मानो यहां पर वे दिखाई देना बंद-सी हो गई हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि इनकी संख्या केरल, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में इसमें 20 % तक कम हुई है और आंध्र प्रदेश में 80 % तक की कमी देखी गई है। इसके अलावा तटीय क्षेत्रों में यह गिरावट निश्चित रूप से 70 से 80 % तक दर्ज की गई है।

गौरैया को क्यों बचाएं?

गौरैया को बचने के लिए हमारा प्रयास सिर्फ इंसानियत की वजह से नहीं है बल्कि गौरैया का विलुप्त होना इस बात का संकेत है कि हमारे आसपास के पर्यावरण में कोई भारी गड़बड़ चल रही है, जिसका खामियाजा हमें आज नहीं तो कल भुगतना ही पड़ेगा। क्योंकि प्रकृति की सभी रचनाएं कहीं न कहीं से किसी न किसी रूप में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष एक-दूसरे पर निर्भर हैं और हम भी उनमें शामिल हैं।

गौरैया को इसलिए भी बचाना चाहिए क्योंकि पारिस्थितिक तंत्र के एक हिस्से के रूप में हमारे पर्यावरण को बेहतर बनाने में अपना योगदान देती है। चूंकि गौरैया अपने बच्चों को अल्फा और कटवर्म नामक कीड़े खिलाती है, जो फसलों के लिए हानिकारक होते हैं। गौरैया मुख्यतः बाजरा, धान, काकून, पके चावल के दाने और कीड़े खाती है।

गौरैया को कैसे बचाएं?

गौरैया को अंग्रेजी में ‘हाउस स्पैरो’ यानी घर में रहने वाली चिड़िया कहते है। गौरैया को हमसे बस थोड़ा-सा प्यार और थोड़ी-सी फिक्र चाहिए, और उसको रहने के लिए हमारे घर में और हमारे दिल में थोड़ी-सी जगह चाहिए वह तो दे ही सकते है।

गौरैया सिर्फ घरों में ही नहीं छोटे पेड़ों और झाड़ियों में भी घोंसला बनाती है। घरों में लगे घोंसलों को उजाड़े नहीं और छोटे पेड़ों और झाड़ियों को भी काटें-छांटें नहीं। गौरैया अक्सर बबूल, कनेर, नींबू, अमरूद,बांस आदि छोटे पेड़ों को पसंद करती है।

इन्हें अब कोई लगाना नहीं चाहता, कोशिश यह करें कि इन छोटे पेड़ों को लगाएं। मोबाइल फ़ोन के टावर भी गौरैया समेत दूसरे पक्षियों के लिए बड़ा ख़तरा बने हुए हैं। इनसे निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें उनकी प्रजनन क्षमता पर बुरा प्रभाव डालती हैं।

इससे निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों की फ्रिक्वेंसी को कम किया जाए। इसके अलावा उनके दाना-पानी की भी समस्या है, गर्मियों के दिनों में दाना-पानी की समस्या रहती है, न जाने कितनी गौरैया भूख- प्यास से मर जाती हैं इसलिए इनके लिए दाने- पानी को इंतजाम अवश्य करें।

पूरे विश्व में हर वर्ष 20 मार्च को गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। गौरैया के जीवन संकट को देखते हुए हमारी छोटी-सी कोशिश गौरैया को जीवनदान दे सकती है। गौरैया के लिए नमक हानिकारक होता है इसलिए नमक वाला खाना नहीं डालना चाहिए!

आप पास कोई जानकारी हो अवश्य दें।

Kg, Km और Kl में किलो कॉमन क्यों है, किलो का क्या तात्पर्य है ।।

वजन नापने के लिए किलोग्राम, दूरी नापने के लिए किलोमीटर और तरल पदार्थ नापने के लिए किलोलीटर, सवाल यह है कि किसी भी प्रकार के नाप के लिए Kilo कॉमन क्यों होता है। किलो से क्या तात्पर्य है। यह किलो कहां से आया है और दुनिया भर के नापतोल से इसका क्या रिश्ता है। आइए आज किलो के माता-पिता का पता लगाते हैं:-

विशेषज्ञों ने इसके बारे में काफी जानकारी संग्रहित की है। संख्या को शब्दों में प्रदर्शित करने के लिए सारी दुनिया में कई प्रकार के शब्दों प्रयोग किए जाते हैं। जैसे हम भारत में इकाई, दहाई, सैकड़ा और हजार आदि शब्दों का उपयोग करते हैं। जानकार बताते हैं कि 'ग्रीक भाषा मे 1000 संख्या को प्रदर्शित करने के लिए 'चिलिओई' शब्द का प्रयोग किया जाता था जिसे समय के साथ किलोई, फिर किलो बोला जाने लगा। Chilioi... Kilo (चिलिओई... किलो)। इस प्रकार बाजार में एक हजार की संख्या के लिए किलो शब्द का उपयोग करने लगे। 

यूनान अथवा यवन जिसे पश्चिमी देशों में ग्रीक कहा जाता है, अपने समय की सबसे समृद्धशाली संस्कृति रही है। इसका व्यापार सारी दुनिया (पश्चिम जर्मनी, संयुक्त राज्य अमरीका, ब्रिटेन, आस्ट्रिया, इटली, फ्रांस तथा मिस्त्र) में फैला हुआ था। इसलिए ग्रीक भाषा की नापतोल के शब्दों को सारी दुनिया के बाजार में स्वीकार किया गया। यही कारण है कि दूध नापना हो या सड़क, ग्रीक भाषा के Kilo का ही उपयोग किया जाता है। यहां तक की दुनिया भर की मुद्राओं में 000 के लिए भी Kilo (2k, 33k, 100k) आदि का ही उपयोग किया जाता है।

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पलकों का झपकना क्यों जरूरी है?

आंखें हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण इंद्रियों में से एक है, ऐसे में अपनी आंखों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। चिकित्सकों की मानें तो आंखों की सेहत के लिए अपनी पलकों को झपकाना जरूरी है। क्योंकि यह आपकी आंखों को नम और ऑक्सीजन युक्त रहने में मदद करता है, और आपकी आंखों से गंदगी या मलबे को भी साफ करता है। लेकिन जब आप ऐसा नहीं करते हैं तो इसके चलते आपकी आंखों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अब सवाल यह उठता है कि आप इसका पता कैसे लगा सकते हैं कि आप अपनी पलकों को पर्याप्त नहीं झपका रहे हैं? साथ ही पलकों का कितनी बार झपकना जरूरी है?

🎛️पलकों का झपकना क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि हम में से ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लास के दौरान लैपटॉप या मोबाईल की स्क्रीन पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। जिसके चलते अक्सर हम पलक झपकना भूल जाते हैं। जब आपकी पलकें झपकती हैं तो आंसू द्रव की एक फिल्म, जिसे टियर फिल्म कहते हैं आंखों की सतह को एक निश्चित मोटाई प्रदान करती है और थोड़ी देर के लिए आपकी आंखों पर बनी रहती है। यदि आप बार-बार पलक नहीं झपकाते हैं, तो यह टियर फिल्म आपके नेत्रगोलक या कॉर्निया पर नहीं फैलेगी जिससे आंखों में सूखापन आ जाता है, जो आपकी आंखों को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। टियरफिल्म वह तरल पदार्थ है जो आपकी आंखों की सतह को ढकता है।

🎛️टियरफिल्म क्यों जरूरी है?
यह आपकी आंख की सतह पर एक नम वातावरण बनाए रखने में मदद करती है, जो उपकला कोशिकाओं को शुष्क और क्षतिग्रस्त होने से रोकता है। कॉर्निया को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में मदद करती है क्योंकि इसमें रक्त की आपूर्ति नहीं होती है। साथ ही यह आंखों से गंदगी, मलबे और हानिकारक पदार्थों को धोती और बाहर निकालती है। जीवाणुरोधी पदार्थों की उपस्थिति के कारण संक्रमण को रोकने में मदद करती है। इसके अलावा आंसू आंखों को मूव करने की गति को लुब्रिकेट करते हैं और सुगम बनाते हैं।

🎛️आप पर्याप्त पलकें नहीं झपका रहे हैं कैसे पता करें?
डाक्टरों की मानें तो जब आप पर्याप्त पलकें नहीं झपकाते हैं तो कुछ आंखों से संबंधित परेशानियां संकेत या लक्षण के रूप में दिखाई दे सकते हैं। जैसे-
▪️आंखों में सूखापन महसूस होना
▪️आंखों में जलन
▪️विदेशी शरीर सनसनी (सैंडी)
▪️आंखों में खुजली
▪️ओकुलर डिस्कम्फर्ट

🎛️कितनी बार पलकें झपकाना है जरूरी
विशेषज्ञों की मानें तो हमें प्रत्येक मिनट में लगभग 15 से 20 बार पलकें जरूर झपकानी चाहिए।

🎛️आंखों को स्वस्थ रखने के लिए लगातार झपकाएं पलकें
डॉक्टर सलाह देते हैं कि आंखों को स्वस्थ रखने के लिए लगातार और बार-बार पलकें झपकानी चाहिए। क्योंकि लगातार पलकें झपकाने से आंखों की पुतली पर आंसू की परत फैलने में मदद मिलती है जिससे आपकी आंखें स्वस्थ रहती हैं।

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किंकर्तव्यविमूढ़ को अंग्रेजी में क्या कहते हैं, इसका हिंदी अर्थ क्या है, कब प्रयोग किया जाता है 😊

संस्कृत से जन्मी हिंदी में कई ऐसे शब्द है जो अब केवल हिंदी शब्दों के संग्रहालय में ही पढ़ने को मिलते हैं। अंग्रेजी से मिक्सिंग होने के बाद इन शब्दों का जैसे हुक्का पानी ही बंद हो गया है। 'किंकर्तव्यविमूढ़' एक ऐसा ही शब्द है। आइए जानते हैं, किंकर्तव्यविमूढ़ को अंग्रेजी में क्या कहते हैं और 'किंकर्तव्यविमूढ़' शब्द का प्रयोग कब किया जाता है।

किंकर्तव्यविमूढ़ शब्द का सरल हिंदी में अर्थ एवं इंग्लिश वर्ड👉🏻

किंकर्तव्यविमूढ़ शब्द एक ऐसी परिस्थिति का वर्णन करता है जबकि आप आश्चर्यचकित होते हैं। कुछ ऐसा हो जाता है जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की थी और चौंकाने वाली उस घटना के कारण आप समझ नहीं पाते हैं कि आपको क्या करना है। यानी कि ऐसी परिस्थिति जब आप आश्चर्यचकित होते हैं लेकिन डिसाइड नहीं कर पाते कि आपको क्या करना है। ऐसी परिस्थिति को किंकर्तव्यविमूढ़ होना कहते हैं। यह एक संशय की स्थिति होती है। इसे और अधिक सरल किया जाए तो, किंकर्तव्यविमूढ़ का हिंदी में अर्थ होता है:- "क्या करें क्या न करें" के असमंजस में मन उलझना। अंग्रेजी में इसे bewildered, puzzle-headed अथवा puzzle-pated कहते हैं। 

किंकर्तव्यविमूढ़ शब्द का उदाहरण👉🏻

दरअसल यह एक शब्द नहीं है बल्कि 3 शब्दों का समूह है।किं+कर्तव्य+विमूढ़। यहां 'किं' का अर्थ है 'क्या', कर्तव्य का अर्थ है 'करना' और विमूढ़ का अर्थ है जड़ हो जाना। इसके कई उदाहरण है, जैसे:- राज्य में ऐसी कोई परंपरा नहीं थी और ना ही न्याय प्रक्रिया में ऐसा कोई विधान, लेकिन अहिल्या के तर्कों को सुनकर महाराज जी किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए।

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इसे नर्क का दरवाजा कहा जाता है, जानिए धरती पर नर्क का दरवाजा खुलने की एक खौफनाक हकीकत ।।

तुर्कमेनिस्तान के देरवेजे विलेज में 230 फीट गहरी खाई को यहां के लोगों ने ‘जहन्नुम का रास्ता (डोर टू हेल)’ नाम दिया है. 40 सालों (1971) से ही लगातार जलती इस खाई में ऊपर उठ रही आग की लपटें और उबलते हुए कीचड़ साफ देखे जा सकते हैं.

दरअसल 1971 में इस इलाके में बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस और ऑयल होने की संभावना जानकर यहां खुदाई के लिए कैंप लगाए गए लेकिन खुदाई हो पाती उससे पहले ही ड्रिलिंग करते हुए अचानक एक बड़े क्षेत्र की मिट्टी अपने आप ढहकर खाई बन गई. उससे इतनी ज्यादा मात्रा में मिथेन गैस निकल रही थी कि तुर्कमेनिस्तान के आसपास के कई गांवों की आबादी के लिए यह खतरा बन गया. इस खतरे से लोगों की जान बचाने के लिए वैज्ञानिकों को सबसे अच्छा तरीका इसे जलाकर खत्म देना लगा और ऐसा किया भी गया. उनका अंदाजा था कि कुछ दिनों में गैस जलकर खत्म हो जाएगी लेकिन उनके अनुमान से कहीं बहुत ज्यादा वह गैस आज भी जल रही है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर तब ऐसा नहीं किया गया होता तो कितनी भयंकर तबाही मची होती.

काराकुम मरुस्थल जहां देरवेजे स्थित है दुनिया में रिजर्व प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा स्रोत है. दरवीजी गांव की इस खाई (डोर टू हेल) को देखने के लिए हर साल हजारों पर्यटक आते हैं. दिन में सूरज की रोशनी में यह उतना भयानक नहीं लगता लेकिन शाम ढ़लते ही भयानक आग की लपटों में इसके अंदर उबलता हुआ मेटल हर किसी को रोमांचित करता है.

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इलाचंद्र जोशी के उपन्यासों के बारे में और महत्वपूर्ण उपन्यासों की विषय वस्तु के बारे में जानकारी ❣

1. लज्जा (1929)

इसमें पूर्व में ‘घृणामयी’ शीर्षक से प्रकाशित लज्जा’ में लज्जा नामक आधुनिका, शिक्षित नारी की काम भावना का वर्णन किया गया है ।

2.सन्यासी(1941)

इस उपन्यास में नायक नंदकिशोर के अहम भाव एवं कालांतर में अहम भाव का उन्नयन दिखाया गया है ।


3.पर्दे की रानी(1941)

इस उपन्यास में खूनी पिता और वेश्या पुत्री नायिका निरंजना की समाज के प्रति घृणा और प्रतिहिंसा भाव की अभिव्यक्ति गई है ।

4.प्रेत और छाया(1946)

इसमें नायक पारसनाथ की हीन भावना एवं स्त्री जाति के प्रति घृणा का भाव दिखाया गया है ।

5.निर्वासित(1948)

इस उपन्यास में महीप नामक प्रेमी की भावुकता निराशावादिता का एवं दुखद अंत को कहानी के माध्यम से चित्रण किया गया है

6. मुक्तिपथ(1950)

इसमें कथानायक राजीव और विधवा सुनंदा की प्रेमकथा सामाजिक कटाक्ष के कारण शरणार्थी बस्ती में जाना ,राजीव का सामाजिक कार्य में व्यस्तता और सुनंदा की उपेक्षा के फलस्वरुप सुनंदा की वापसी को दिखाया गया है

7.जिप्सी(1952)

इस उपन्यास में जिप्सी बालिका मनिया की कुंठा और अंत में कुंठा का उदात्तीकरण दर्शाया गया है

8. सुबह के भूले(1952)

गुलबिया नामक एक साधारण किसान पुत्र की अभिनेत्री बनने एवं वहां के कृत्रिम जीवन से उठकर पुनः ग्रामीण परिवेश में लौटने की कथा का वर्णन किया गया है

9. जहाज का पंछी(1955)

इस उपन्यास में कथानायक शिक्षित नवयुवक का कोलकाता में नगर रूपी जहाज में ज्योतिषी, ट्यूटर ,धोबी के मुनीम ,रसोइए ,चकले ,लीला के सेवक इत्यादि के रूप में विविध जीवन स्थितियों एवं संघर्षों का वर्णन किया गया है

10.ऋतुचक्र(1969)

इसमें आधुनिक दबावों के फल स्वरुप परंपरागत मूल्यों, मान्यताओं ,आदर्शों के तेजी से ढहने एवं उनके स्थान पर नए मूल्यों आदर्शों के निर्माण न होने की कथा का वर्णन किया गया है उपन्यास में खूनी पिता और वेश्या पुत्री नायिका निरंजना की समाज के प्रति घृणा और प्रतिहिंसा भाव की अभिव्यक्ति गई है।

11. भूत का भविष्य (1973)

12. कवि की प्रेयसी (1976)

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स्वर कोकिला लता मंगेशकर।।


* _लता मंगेशकर भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका थी_
*  _लता जी ने अंतिम सांस 6 फरवरी 2022 को ली उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी है_
* _लता का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था_
* लता के लिए गाना पूजा के समान है रिकॉर्डिंग के समय वह हमेशा नंगे पैर ही गाती थी
* लता को फोटोग्राफी का बहुत शौक है विदेशों में उनके द्वारा उतारे गए छाया चित्रों की प्रदर्शनी भी लग चुकी है
* _भारत के किसी बड़े क्रिकेट मैच के दिन  सारे काम छोड़ मैच देखना पसंद करती थी_
* कागज पर कुछ भी लिखने के पूर्व वे श्रीकृष्ण लिखती थी
* लता का पसंदीदा खाना कोल्हापुरी मटन और भुनी हुई मछली थी
* चेखव, टॉलस्टॉय, खलील जिब्रान, ज्ञानेश्वरी और गीता का साहित्य उन्हें पसंद थी
* कुंदनलाल सहगल और नूरजहां उनके पसंदीदा गायक गायिका थे
* _गुरुदत्त सत्यजीत रे यश चोपड़ा और बिमल राय की फिल्में उन्हें पसंद थी_
* त्योहारों में उन्हें दीपावली बेहद पसंद थी
* _भारतीय इतिहास और संस्कृति में उन्हें कृष्ण मीरा विवेकानंद और अरबिंदो बेहद पसंद थे_
* लता को मेकअप पसंद नहीं था
* दूसरों पर तुरंत विश्वास कर लेना अपनी आदत को अपनी कमजोरी मानती थी
* _स्टेज पर गाते हुए उन्हें पहली बार ₹25 मिले और अभिनेत्री के रूप में उन्हें ₹300 पहली बार मिले थे_
* उस्ताद अमान खान भिंडी बाजार वाले और पंडित नरेंद्र शर्मा को व संगीत में अपना गुरु मानती थी और उनके आध्यात्मिक गुरु थे श्रीकृष्ण शर्मा
* महाशिवरात्रि सावन सोमवार के अलावा गुरुवार को व्रत रखती थी
* _लता ने पहला गीत मराठी फिल्म कीती हंसाल (1942) में गाया लेकिन किसी कारणवश इस गीत को फिल्म में शामिल नहीं किया गया_
* मराठी फिल्म पाहिली मंगल्लागौर (1942) में उनकी आवाज पहली बार सुनाई दी
* हिंदी फिल्मों में आपकी सेवा में (1947) में लता ने पहली बार गाया

* लता ने अंग्रेजी, असमिया, बांग्ला, ब्रजभाषा, डोगरी, भोजपुरी, कोंकणी, कन्नड़, मागधी, मैथिली, मणिपुरी, मलयालम, हिंदी, सिंधी, तमिल, तेलुगू, उर्दू, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंहली आदि भाषाओं में गीत गाए है
* लता मराठी भाषी है परंतु वे हिंदी, बांग्ला, तमिल, संस्कृत, गुजराती और पंजाबी भाषा में बतिया लेती है
* लता 'लेकिन' 'बादल' और 'कांचनगंगा' जैसी  फिल्मों की निर्माता भी रह चुकी है
* आजा रे परदेसी (मधुमती-1958), कहीं दीप जले कहीं दिल (बीस साल बाद-1962), तुम्हीं मेरे मंदिर (खानदान-1965), और आप मुझे अच्छे लगने लगे (जीने की राह-1969) के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने के बाद लता ने इस पुरस्कार को स्वीकार करना बंद कर दिया वह चाहती थी कि नई गायक गायिकाओं को यह पुरस्कार मिले
* परिचय (1972), कोरा कागज (1974), और लेकिन (1990) के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं
* 1951 में लताजी ने सर्वाधिक 225 गीत गाए थे
* *प्रमुख पुरस्कार*
> पद्मभूषण, 1969
> दादासाहब फाल्के, 1989
> राजीव गांधी पुरस्कार, 1997
> पद्मा विभूषण, 1999
> भारत रत्न, 2001
और बहुत से अन्य पुरस्कार भी मिले
* बचपन में लता को रेडियो सुनने का बड़ा शौक था। जब वह 18 वर्ष की थी तब उन्होने अपना पहला रेडियो खरीदा और जैसे ही रेडियो ऑन किया तो के.एल.सहगल की मृत्यु का समाचार उन्हें प्राप्त हुआ। बाद में उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया
* लता को अपने बचपन के दिनों में साइकिल चलाने का काफी शौक था, जो पूरा नहीं हो सका। अलबत्ता उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी
* _लता को मसालेदार भोजन करने का शौक है और एक दिन में वह तकरीबन 12 मिर्च खा जाती हैं उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ जाती है_
* लता जब हेमंत कुमार के साथ गाने गाती थीं तो इसके लिए उन्हें ‘स्टूल’ का सहारा लेना पड़ता था इसकी वजह यह थी कि हेमंत कुमार उनसे काफी लंबे थे
* लता फिल्म इंडस्ट्री में मृदु स्वभाव के कारण जानी जाती हैं, लेकिन दिलचस्प बात है कि किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे गायकों के साथ भी उनकी अनबन हो गई थी
* लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोसले को स्कूल लेकर गई तो अध्यापक ने आशा भोसले को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी हालांकि बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविद्यालयों ने मानक उपाधि से नवाजा
* उन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ उनके अलावा सत्यजीत रे को ही यह गौरव प्राप्त है
* वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में उन्हें पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त है
* लता की सबसे पसंदीदा फिल्म द किंग एंड आई है। हिंदी फिल्मों में उन्हें त्रिशूल, शोले, सीता और गीता, दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे और मधुमती पसंद हैं
* वर्ष 1943 में रिलीज किस्मत उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे लगभग 50 बार देखा था
* उन्हें डायमंड रिंग पहनने का शौक है उन्होंने अपनी पहली डायमंड रिंग वर्ष 1947 में 700 रुपये में खरीदी थी
* लता अपने करियर के शुरुआती दौर में डायरी लिखने का शौक रखती थी जिसमें वह गाने और कहानी लिखा करती थी बाद में उन्होंने उस डायरी को अनुपयोगी समझ कर उसे नष्ट कर दिया
* उनके पिताजी द्वारा दिया गया तम्बूरा उन्होंने अब तक संभालकर रखा है
* हिट गीत 'आएगा आने वाला' के लिए उन्हें 22 रीटेक देने पड़े थे
* लता ने पहली बार पार्श्व गायन नायिका मुनव्वर सुल्ताना के लिए किया था
* बतौर अभिनेत्री लता ने कई हिन्दी व मराठी फिल्मों में काम मिया है हिन्दी में वे बड़ी माँ, जीवन यात्रा, सुभद्रा, छत्रपति शिवाजी जैसी फिल्मों में आ चुकी हैं
* पुरुष गायकों में मोहम्द रफी के साथ लता ने सर्वाधिक 440 युगल गीत गाए। जबकि 327 किशोर के साथ। महिला युगल गीत उन्होंने सबसे ज्यादा आशा भोंसले के साथ गाए हैं
* गीतकारों में आनंद बक्शी द्वारा लिखें 700 से अधिक गीत लता ने गाए



बंदी सेल्यूकस की पुत्री से चंद्रगुप्त का विवाह...


सभी राजदरबारी अनुशासित दरबार में बैठे थे तभी बिगुल बज उठा- राजाधिराज मगधाधिपति सम्राट चंद्रगुप्त पधार रहे हैं... सभी दरबारी खड़े हो गए।

चंद्रगुप्त ने दरबार में प्रवेश किया और सिंहासन पर बैठ गया। चाणक्य भी अपने आसन पर बैठ गए। फिर चाणक्य ने बंदी सेल्यूकस को ससम्मान दरबार में प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

कुछ देर बाद ही सेल्यूकस को सभा में प्रवेश किया। उसकी गर्दन न तो झुकी हुई थी और न ही तनी हुई। उसे किसी भी प्रकार की हथकड़ियां नहीं पहनाई गई थीं। उसके आसपास दो सैनिक चल रहे थे। चाणक्य ने स्वयं खड़े होकर सेल्यूकस का स्वागत करते हुए कहा- यूनान के महान सम्राट का आर्यावर्त के मगध साम्राज्य में स्वागत है।

सेल्यूकस ने इस बात को व्यंग्य समझते हुए कहा- क्या बंदियों और अतिथियों को इसी तरह आपका देश लज्जित करता है? आपके सामने में महज एक बंदी हूं, सम्राट नहीं।

चाणक्य ने अपनत्व से यूनानी सम्राट को गले लगाते हुए कहा- भारतवासी अतिथि को भगवान मानते हैं सम्राट। और जहां तक बंदी होने का प्रश्न है तो हमने कभी आपको शत्रु नहीं समझा, आपने ही हमे शत्रु समझकर आक्रमण किया। हम तो आपसे मैत्रीभाव रखते हैं यूनानी सम्राट। हम तो यूनान और भारत के संबंध प्रगाढ़ करना चाहते हैं इसीलिए आपको मैत्रीभाव से यहां बुलाया गया है।

सेल्यूकस ने कहा- आप जानते हैं मित्रवर कि एक वीर पुरुष अपने प्राणों की भीख नहीं मांगता। आप चाहते हैं कि मैं अपने प्राणों की रक्षा के लिए आपका मित्र बन जाऊं?

चाणक्य- नहीं सम्राट। यदि हमें आपके प्राण प्यारे नहीं होते तो हम युद्ध में ही आपका वध कर देते। हम तो हृदय से आपसे मित्रता चाहते हैं और जहां तक सवाल जीत का है तो हम भी आपसे पराजित हो जाते तब आप क्या करते?

चाणक्य का यह उत्तर सुनकर सेल्यूकस सोच में पड़ गया। फिर चाणक्य ने कहा- जय-पराजय तो चलती रहती है सम्राट, लेकिन किसी अच्छे उद्देश्य के लिए हार जाना भी हितकर है और बुरे हित के लिए जीत जाने से हमारी आने वाली ‍पीढ़ियां हमें श्राप देती रहती है। आपको और हमको मिलकर इस धरती का इतिहास बदलना है। वर्षों से चली आ रही आक्रमण की नीति को छोड़कर कुछ नया सोचना है।

सेल्यूकस- लेकिन महात्मन् आप एक पराजित योद्धा से कैसे मित्रता की अपेक्षा कर सकते हैं। जब मुझे पहली बार छोड़ा गया तो मैं दूसरी बार फिर सेना लेकर आ गया। अब भी क्या आपको लगता नहीं कि मैं मुक्त होने के बाद फिर से सेना लेकर बदला लेने आ जाऊंगा?

चाणक्य ने कहा- आओ! कुछ अंतरंग बातें करते हैं। ऐसा कहकर चाणक्य सेल्यूकस को एक गुप्त कक्ष में ले गए और फिर कहने लगे- यूनान सम्राट! हम पर्याप्त विचार-विमर्श और सोच-समझकर यह बात आपके समक्ष रख रहे हैं। इसे स्वीकार करना या नहीं करना आपकी स्वतंत्रता है। हम आपको वचन देते हैं कि आप अस्वीकर करेंगे तब भी हम आपको ससम्मान आपके राज्य में छोड़कर आएंगे।

सेल्यूकस ने कहा- कहिए?

चाणक्य- मैं पूरी जिम्मेदारी से इस बात का खुलासा करता हूं कि आपकी पुत्री हेलेन और सम्राट चंद्रगुप्त दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं। यदि आपकी अनुमति हो तो हम दोनों के विवाह का प्रबंध कर देते हैं। यदि आपको लगता है कि यह सच नहीं है तो आप अपनी पुत्री से इस विषय में चर्चा कर लें। आपका जो भी निर्णय होगा, उसका हम स्वागत करेंगे।

सेल्यूकस इस दूरदर्शी प्रस्ताव को सुनकर सोच में पड़ गया और तब चाणक्य ने कहा- राजन! आपके पास सोचने का बहुत वक्त है आप अतिथिगृह में जाकर आराम करें।

... संपूर्ण मगध में हेलेन और चंद्रगुप्त के विवाह का समाचार जब फैला तो...

इधर, हेलन ने अपने पिता सेल्यूकस से कहा- यह सही है कि चंद्रगुप्त के प्रति मुझमें अनुराग हैं किंतु पिताजी धर्म इस संबंध में बाधक तो नहीं होगा?

बेटी हमारा धर्म तो इस संबंध में बाधक नहीं होगा किंतु यहां का आर्य धर्म क्या इसकी इजाजत देगा। मैं यही सोच रहा हूं कि क्या यहां का राज्य तुम्हें बहू के रूप में स्वीकार करेगा। यदि नहीं करेगा तो आने वाली संतानों का भविष्य क्या होगा?

सेल्यूकस इस विवाह के राजी थे तो उन्होंने चाणक्य के समक्ष अपनी शंकाएं जाहिर कीं।

चाणक्य ने कहा- राजन मैंने पूरे नगर में मुनादी करा दी है कि जो भी इस विवाह के विरुद्ध हो वह अपने तर्क लेकर राजदरबार में तीन दिन के भीतर उपस्थित होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराए। उसकी आपत्ति पर ध्यान दिया जाएगा।

घोषणा के बाद राज्य में विरोध के स्वर बुलंद हो गए.....
तीन दिन बाद राजदरबार में विद्वान पंडितों की भीड़ इकट्डी हो गई थी। कुछ पंडित लोगों को अपना तर्क समझा रहे थे। विचित्र-सा शोर था तभी चाणक्य ने सभा प्रांगण में प्रवेश किया और सभी तरह का शोर बंद हो गया। चाणक्य ने एक तीक्ष्ण दृष्टि सभी पर घुमाई और फिर वे स्वयं आसन पर जाकर बैठ गए।

बैठकर उन्होंने आगंतुकों को संबोधित करते हुए कहा- आप सभी आदरपूर्वक बैठ जाएं। ...इस सभा में पधारे सभी विद्वानों को मेरा नमस्कार। आप इस सभा में अपनी आपत्ति दर्ज कराने आए हैं। आप निर्भय होकर तर्कसम्मत अपनी बातें रखें।

कोई भी पंडित चाणक्य के समक्ष बोलने की हिम्मत नहीं जुटा रहा था। तब एक ब्राह्मण खड़ा हुआ और बहुत ही साहस जुटाकर कहने लगा- मान्यवर! मैं आपसे पहले पूछना चाहता हूं कि क्या मगधाधिपति का विवाह यूनान की राजकुमारी हेलेन से किया जा रहा है।

चाणक्य ने उस ब्राह्मण की आंखों में आंखें डालकर कहा- हां...।

ब्राह्मण बोला- यह अधर्म है, इससे वर्णसंकर संतान होगी। आप तो विद्वान हैं। आप जानते ही हैं कि धर्म इसकी स्वीकृति नहीं देता। ...ब्राह्मण की सभी ब्राह्मणों ने एक साथ हां में हां भरी।

चाणक्य ने भृकुटि तानते हुए कहा- चाणक्य के होते हुए मगध में धर्म और नीति के विरुद्ध कुछ भी नहीं हो सकता। मैंने सोच-समझकर ही यह निर्णय लिया है। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि धर्म का अर्थ विनाश है क्या? ...धर्म से ही मानव का कल्याण होता है। धर्म हृदय के मिलन को तोड़ने का प्रयास नहीं करता। धर्म जोड़ने का कार्य करता है, तोड़ने का नहीं। यदि ‍दो लोग आपस में प्रेम करते हैं तो हमारा अधिकार नहीं है कि हम उन्हें धर्म के नाम पर विरह में जीवन जीने के लिए छोड़ दें। यूनान की राजकुमारी हमारे सम्राट चंद्रगुप्त से प्रेम करती है तो इसमें उसका दोष क्या?

... कुछ क्षण रुकने के बाद चाणक्य ने फिर कहा- आप सोचिए यदि धरती के दो विशाल भू-भाग आपस में जुड़ जाएंगे तो भारत और शक्तिशाली ही होगा। हमारी संस्कृति और धर्म का विस्तार ही होगा। हम उनसे कुछ सीखेंगे और वो हमसे कुछ सीखेंगे। इस तरह एक नए युग की शुरुआत होगी।

चाणक्य यह बोल ही रहे थे कि एक पंडित क्रोधित होकर उठ खड़ा हुआ और कहने लगा- शत्रु की पुत्री और वह भी विजातीय... गुरुवर चाणक्य, यह विवाह किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।

चाणक्य भी क्रोध में आ गए- हां तो महानुभाव! आपको यह विवाह स्वीकार नहीं है?...क्या आप इस विवाह से जो शुभ परिणाम निकलेंगे उससे आप परिचत हैं। आप सभी ने सिर्फ यही देखा कि वह एक विजातीय है, वर्णसंकर होगा। लेकिन क्या आपने राज्य के हित और इसके शुभ परिणामों के बारे में सोचा? मान्यवर, राज्य को सिर्फ शांति और प्रेम ही आगे बढ़ा सकता है।

चाणक्य ने रुककर सभी की ओर देखते हुए कहा- यहां कितने लोग धर्मनिष्ठ हैं यह मैं अच्छी तरह जानता हूं। आप जितने भी पंडित और विद्वान लोग हैं आप चाहते तो मैं आपकी पत्रिका पढूं। आपकी जन्मकुंडली मेरे पास है। आप आज्ञा दे तो मैं उसे सभी के समक्ष पढ़कर सुना दूं।

चाणक्य की यह बात सुनकर सभी पंडित शांत हो गए और सभी चाणक्य के तर्क से सहमत होते दिखाई देने का ढोंग करने लगे। सभी मन ही मन सोच रहे थे कि यह हमारी जन्मकुंडली पढ़ने लगा तो पोल खोल देगा, क्योंकि यह विद्वान ज्योतिष भी है।

सभी पंडितों ने एक स्वर में चाणक्य से कहा- नहीं महात्मन, हमने सोचा कि कहीं इस विवाह से मगध का बुरा तो नहीं होगा, किंतु आपके तर्क से हम सहमत हैं और अब हम निश्‍चिंत हैं।

इस तरह चंद्रगुप्त और हेलेन के विवाह का मार्ग खुल गया और राज्य में धूमधाम में उनका विवाह हुआ और चाणक्य की दूरदर्शिता से यूनान और भारत के बीच बार-बार के युद्ध के बजाय मैत्री, शांति और प्रगति का मार्ग खुला।

हवाई जहाज से संबंधित सामान्य ज्ञान ।।

हवाई जहाज में खिड़कियां गोल आकार की ही क्यों रहती हैं, जानिए कुछ रोचक तथ्य 🛩️

हवाई जहाज की यात्रा सबसे सुखद मानी जाती है. लोग कम समय में लंबी दूरी की यात्रा तय कर लेते हैं. फ्लाइट में यात्रा करना एक अच्छा अनुभव भी माना जाता है. लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं. कुछ लोगों को फ्लाइट में ट्रेवल करने से डर भी लगता है और हाल ही में बोइंग 737 मैक्स में हुए दुर्घटना ने लोगों के डर को और बढ़ा दिया है. सुरक्षा कारणों की वजह से फ्लाइट यात्रा के कई नियम होते हैं जैसे कि फोन स्विच ऑफ करना या विंडो शेड खोलना. यह नियम लोग फॉलो तो करते हैं पर इसके पीछे के कारण कम ही लोग जानते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कुछ मिथकों के पीछे का तर्क..

टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए आपकी सीट को सीधा क्यों होना चाहिए? 👉🏻

सीटों को सीधा रखने से यात्रियों को गलियारे में जाने के लिए अधिक जगह मिलती है, जिससे आपात स्थिति में निकासी आसान हो जाती है.

टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए विंडो शेड्स को ऊपर क्यों रखना चाहिए? 👉🏻

माना जाता है कि एक फ्लाइट यात्रा (Flight Travel) में सबसे कठिन समय वो होता है जब जहाज टेक-ऑफ कर रहा हो या लैंडिंग कर रहा हो. ऐसे में हर प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाता है. टेक-ऑफ के समय अगर रनवे पर कोई इमरजेंसी सिचुएशन (Emergency Situation) होती है, तो यात्रियों और चालक दल को हवाई जहाज को तुरंत खाली करने की जरूरत पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में खुली खिड़की के शेड चालक दल को वातावरण, मौसम की स्थिति, इलाके आदि के बारे में जागरूक करने में मदद करेंगे.

हवाई जहाज की खिड़कियां गोल क्यों होती हैं?👉🏻

केबिन और बाहरी वातावरण के बीच दबाव अंतर के कारण होने वाला तनाव कोनों पर केंद्रित हो जाता है, जहां चौकोर खिड़कियों के किनारे मिलते हैं, जिससे हवाई जहाज़ का ढांचे को नुकसान हो सकता है. घुमावदार या गोल खिड़कियां हवा के बाहरी दबाव के तनाव को फैला देती हैं, और इस प्रकार हवाई जहाज की गोल खिड़कियां चौकोर खिडकियों के मुकाबले मजबूत होती हैं और और हवा के दबाव को झेल लेती हैं.

पायलट ईंधन क्यों डंप करते हैं? 👉🏻

कुछ बड़े हवाई जहाजों में ईंधन डंप करने की क्षमता होती है जिसका इस्तेमाल कुछ स्थितियों में विमान के वजन को कम करने के लिए किया जाता है. जब एक हवाई जहाज उड़ान भरता है, तो यह आमतौर पर अपनी लैंडिंग वजन सीमा से अधिक भारी होता है क्योंकि उड़ान के दौरान इस वजन सीमा तक पहुंचने के लिए जब तक वह अपनी डेस्टिनेशन के करीब होता है, तब तक ईंधन जलने की उम्मीद होती है.

डंपिंग फ्यूल (Dumping Fuel) यह सुनिश्चित करता है कि एप्रोच और लैंडिंग के दौरान हवाई जहाज को कम स्पीड से उड़ाया जा सके ताकि इसे उपलब्ध रनवे की लंबाई के भीतर और इसके प्रमाणित लैंडिंग वजन के भीतर रोका जा सके.

क्यों बंद हो जाती है लाइट?👉🏻

किसी भी विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान लाइट बंद (Lights Closed during Take-off and Landing) कर दी जाती हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि हमारी आंखों को अंधेरे से तालमेल बिठाने में समय लगता है. फ्लाइट के अंदर की रोशनी और वाहर के उजाले में फर्क होता है. ऐसे में लोगों की आंखों पर बहुत ज्यादा असर न पड़े इसलिए ऐसा किया जाता है. अंधेरे को समायोजित करने के लिए हमारी आंखों को 10 से 30 मिनट के बीच का समय लग जाता है.

मोबाइल को एयर प्लेन मोड में रखने की जरूरत क्यों है?👉🏻

मोबाइल फोन सिग्नल विमान के नेविगेशन और लैंडिंग गाइडेंस सिस्टम में हस्तक्षेप कर सकते हैं. मोबाइल फोन को हवाई जहाज मोड पर रखकर, यह सेलुलर और वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्शन को बंद कर देता है, जिससे विमान उपकरण के साथ किसी भी संभावित हस्तक्षेप को रोका जा सकता हैं

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DO WE KNOW ACTUAL FULL FORM OF SOME WORDS ?

Interesting 🌸

*ᴏᴋ

ᴏᴛᴛᴏ ᴋʀᴏᴠᴇɴs

*ɴᴇᴡs ᴘᴀᴘᴇʀ

ɴᴏʀᴛʜ ᴇᴀsᴛ ᴡᴇsᴛ sᴏᴜᴛʜ ᴘᴀsᴛ ᴀɴᴅ ᴘʀᴇsᴇɴᴛ ᴇᴠᴇɴᴛs ʀᴇᴘᴏʀᴛ

*ᴄʜᴇss

ᴄᴀᴍᴇʟ, ʜᴏʀsᴇ, ᴇʟᴇᴘʜᴀɴᴛ, sᴏʟᴅɪᴇʀs

*ᴄᴏʟᴅ

 ᴄʜʀᴏɴɪᴄ ᴏʙsᴛʀᴜᴄᴛɪᴠᴇ ʟᴜɴɢ ᴅɪsᴇᴀsᴇ

*ᴊᴏᴋᴇ

ᴊᴏʏ ᴏғ ᴋɪᴅs ᴇɴᴛᴇʀᴛᴀɪɴᴍᴇɴᴛ

*ᴀɪᴍ

ᴀᴍʙɪᴛɪᴏɴ ɪɴ ᴍɪɴᴅ

*ᴅᴀᴛᴇ

ᴅᴀʏ ᴀɴᴅ ᴛɪᴍᴇ ᴇᴠᴏʟᴜᴛɪᴏɴ

*ᴇᴀᴛ

ᴇɴᴇʀɢʏ ᴀɴᴅ ᴛᴀsᴛᴇ

*ᴛᴇᴀ

ᴛᴀsᴛᴇ ᴀɴᴅ ᴇɴᴇʀɢʏ ᴀᴅᴍɪᴛᴛᴇᴅ

*ᴘᴇɴ

ᴘᴏᴡᴇʀ ᴇɴʀɪᴄʜᴇᴅ ɪɴ ɴɪʙ

*sᴍɪʟᴇ

sᴡᴇᴇᴛ ᴍᴇᴍᴏʀɪᴇs ɪɴ ʟɪᴘs ᴇxᴘʀᴇssɪᴏɴ

*sɪᴍ

sᴜʙsᴄʀɪʙᴇʀ ɪᴅᴇɴᴛɪᴛʏ ᴍᴏᴅᴜʟᴇ

*ᴇᴛᴄ

ᴇɴᴅ ᴏғ ᴛʜɪɴᴋɪɴɢ ᴄᴀᴘᴀᴄɪᴛʏ

*ᴏʀ

ᴏʀʟ ᴋᴏʀᴇᴄ (ɢʀᴇᴇᴋ ᴡᴏʀᴅ)

*ʙʏᴇ

ʙᴇ ᴡɪᴛʜ ʏᴏᴜ ᴇᴠᴇʀʏᴛɪᴍᴇ.
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sʜᴀʀᴇ ᴛʜᴇsᴇ ᴍᴇᴀɴɪɴɢs ᴀs ᴍᴀᴊᴏʀɪᴛʏ ᴏғ ᴜs ᴅᴏɴ'ᴛ ᴋɴᴏᴡ 🚩

रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य 🏹

1:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।
2:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।
3:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।
4:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।
5:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।
6:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।
7:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।

8:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।
9:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।
10:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी।
11:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।
12:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला।
13:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।
14:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ।

15:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी हैं।
16:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं।

17:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए।
18:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में।
19:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।

श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी 
(39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ | 

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यह जानकारी महीनों के परिश्रम के बाद आपके सम्मुख प्रस्तुत है। 

गुप्त वंश और उसके शासकों पर महत्वपूर्ण तथ्य ।।

 🔹 चंद्रगुप्त I (319-335 A.D.)

1. चंद्रगुप्त- I घटोत्कच का पुत्र था।
2. चंद्रगुप्त- I ने मगध की प्रमुख शक्ति, एक लिच्छवी राजकुमारी, कुमारा देवी से शादी करके अपनी शक्ति को बढ़ाया।
3. चंद्रगुप्त- I गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक था। उसने मगध, प्रयाग और साकेत पर विजय प्राप्त करके अपने राज्य का विस्तार किया।
4. उन्होंने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।
5. पाटलिपुत्र गुप्त वंश की राजधानी थी।

🔹 समुद्रगुप्त (335-380 A.D.)

1. समुद्रगुप्त चंद्रगुप्त- I का पुत्र था।
2. समुद्रगुप्त द्वारा गुप्त वंश का विस्तार किया गया था।
3. उनकी बहादुरी और सेनापती के कारण, इतिहासकार वी। ए। स्मिथ ने उन्हें भारत के नेपोलियन के रूप में उद्धृत किया।
4. गुप्त युग के कुछ सिक्कों पर समुद्रगुप्त को वाद्य यंत्र वीणा बजाते हुए दिखाया गया था।
5. समुद्रगुप्त के दरबार में महत्वपूर्ण विद्वान हरिशेना, वसुबंधु और असंग थे।
6. हरिसेन द्वारा संस्कृत में रचित प्रयाग प्रशस्ति (जिसे अल्लाहबाद स्तंभ शिलालेख भी कहा जाता है) ने समुद्रगुप्त की प्राप्ति के बारे में जानकारी दी।
7. समुद्रगुप्त कला और संगीत का एक महान संरक्षक था। उन्होंने कविराज की उपाधि धारण की।
8. समुद्रगुप्त हिंदू धर्म में एक दृढ़ विश्वास था और भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए जाना जाता है।
9. समुद्रगुप्त ने श्रीलंका के बौद्ध राजा मेघवर्मन को बोधगया में एक मठ बनाने की अनुमति दी।

🔹 चंद्रगुप्त- II (380-413 A.D.)

1. चंद्रगुप्त- II समुद्रगुप्त का पुत्र था।
2. समुद्रगुप्त की मृत्यु के बाद, रामगुप्त ने उसे सफल किया लेकिन उसके बड़े भाई चंद्रगुप्त- II ने उसे मार डाला और अपनी पत्नी ध्रुवदेवी से शादी कर ली।
3. चन्द्रगुप्त-द्वितीय ने रुद्रसिंह तृतीय को परास्त किया, शक राजा और अपने राज्य को निकाल दिया और विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।
4. चंद्रगुप्त- II चांदी के सिक्के जारी करने वाला पहला शासक था। उसने तांबे के सिक्के भी जारी किए।
5. पाटलिपुत्र गुप्त वंश की राजधानी बना रहा। उज्जैन को गुप्त वंश की दूसरी राजधानी बनाया गया था।
6. चंद्रगुप्त- II का दरबार नौ रत्नों (नवरत्नों) से युक्त था, जिनमें कालिदास, अमरसिंह, वराहमिहिर, धन्वंतरि, आदि शामिल थे।
7. चीनी यात्री फा-हेन चंद्रगुप्त-द्वितीय के शासनकाल के दौरान आया था।

🔹 कुमारगुप्त- I (413-455 A.D.)

1. कुमारगुप्त- I चंद्रगुप्त- II का पुत्र था। उसने चंद्रगुप्त-द्वितीय को सफलता दिलाई।
2. कुमारगुप्त-प्रथम ने महेन्द्रादित्य की उपाधि धारण की।
3. उसके शासनकाल के बाद के वर्ष के दौरान गुप्त साम्राज्य को मध्य भारत के पुष्यमित्रों के विद्रोह और हूणों के आक्रमण से खतरा था। हालाँकि, कुमारगुप्त- I दोनों खतरों को हराने में सफल रहा और अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए अश्वमेध (घोड़े की बलि) किया।
4. कुमारगुप्त- I ने भगवान कार्तिकेय की छवियों के साथ नए सिक्के जारी किए।
5. कुमारगुप्त- I ने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की।
6. कुमारगुप्त- I के बाद उनके पुत्र स्कन्दगुप्त हुए। स्कंदगुप्त ने हूणों का प्रभावी ढंग से सामना किया।
7. हूणों के लगातार हमलों ने गुप्त वंश को कमजोर किया। 467 ई। में स्कन्दगुप्त की मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद, गुप्त वंश का पतन शुरू हुआ।

♻️ Important facts on Gupta Dynasty and its rulers ♻️

🔹 Chandragupta I (319-335 A.D.)

1. Chandragupta-I was the son of Ghatotkacha.
2. Chandragupta-I enhanced his power by marrying Kumara Devi, a Lichchhavi princess—the main power in Magadha.
3. Chandragupta-I was the real founder of Gupta dynasty. He expanded his kingdom by conquering much of Magadha, Prayaga and Saketa.
4. He assumed the title of Maharajadhiraja.
5. Patliputra was the capital of Gupta dynasty.

🔹 Samudragupta (335-380 A.D.)

1. Samudragupta was the son of Chandragupta-I.
2. The Gupta dynasty was enlarged enormously by Samudragupta.
3. Due to his bravery and generalship, the historian V. A. Smith quoted him as Napoleon of India.
4. On some coins of Gupta era Samudragupta was shown as playing the musical instrument Veena.
5. Important scholars in the court of Samudragupta were Harishena, Vasubandhu and Asanga.
6. The Prayag Prashasti (also known as Allahbad pillar inscription) composed in Sanskrit by Harisena gave information about Samudragupta's achievment.
7. Samudragupta was a great patron of art and music. He assumed the title of Kaviraja.
8. Samudragupta was a firm believer in Hinduism and is known to have worshipped Lord Vishnu.
9. Samudragupta allowed Sri Lanka's Buddhist king Meghavarman to build a monastery at Bodh Gaya.

🔹 Chandragupta-II (380-413 A.D.)

1. Chandragupta-II was the son of Samudragupta.
2. After Samudragupta's death, Ramagupta succeeded him but his elder brother Chandragupta-II killed him and married his wife Dhruvadevi.
3. Chandragupta-II defeated Rudrasimha III, the Saka king and annexed his kingdom and assumed the title of Vikramaditya.
4. Chandragupta-II was the first ruler to issue silver coins. He also issued copper coins.
5. Patliputra continued to be the capital of Gupta dynasty. Ujjain was made second capital of Gupta dynasty.
6. Court of Chandragupta-II was adorned by nine gems (navratnas) including Kalidasa, Amarsimha, Varahmihira, Dhanvantri, etc.
7. Chinese traveller Fa-hein came during the reign of Chandragupta-II.

🔹 Kumaragupta-I (413-455 A.D.)

1. Kumaragupta-I was the son of Chandragupta-II. He succeeded Chandragupta-II.
2. Kumaragupta-I adopted the title of Mahendraditya.
3. During the later year of his reign the Gupta Empire was threatened by the rebellion of Pushyamitras of central India and invasion of the Hunas. However, Kumaragupta-I was successful in defeating both threats and performed Ashvamedha (horse sacrifice) to celebrate his victory.
4. Kumaragupta-I issued new coins with images of Lord Kartikeya.
5. Kumaragupta-I founded the Nalanda university.
6. Kumaragupta-I was followed by his son Skandagupta. Skandagupta faced the Hunas effectively.
7. The continuous attacks of the Hunas weakened the Gupta dynasty. Skandagupta died in 467 A.D. After his death, the Gupta dynasty began to decline.