वैदिक संस्कृति से सम्बंधित 29 बेहद महत्वपूर्ण तथ्य 📜

० ऋग्वेद में ‘आर्य’ शब्द का ३६ बार उल्लेख है|

० ऋग्वेद की अनेक बातें अवेस्ता से मिलाती है, जो ईरानी भाषा का प्राचीनतम ग्रन्थ है|

० सिन्धु नदी की ऋग्वेद में सर्वाधिक चर्चा की गई है|

० ऋग्वेद में सरस्वती को नदीतमा (पवित्र नदी) काहां गया है|

० ऋग्वेद में गंगा की एक बार एवं यमुना की तीन बार चर्चा की गई है|

० दसराज्ञ युध्द भारत वंश के राजा सुदास तथा एनी दस राजाओं के बीच परुष्णी नदी के तट पर हुआ था, जिसमे सुदास की विजय हुई थी|

० ऋग्वेद में सभा की ८ बार, समिति की ९ बार तथा विद्थ की २२ बार चर्चा की गई है|

० ऋग्वैदिक काल में राजा को जनस्य गोपा,विश्पति, गणपति एवं गोपति कहा जाता है|

० ऋग्वैदिक कालीन प्रशासन में सबसे प्रमुख पुरोहित था|

० जनप्रशासन की सर्वोच्च ईकाई थी|

० सर्वप्रथम ऋग्वेद के दसवें मंडल में वर्णित पुरुष सूक्त में चार वर्णों की उत्पत्ति का वर्णन मिलता है|

० अपाला, घोषा, लोपामुद्रा, विश्ववारा, सिक्ता को वैदिक रिचाओ को लिखने का श्री दिया जाता है |

० ऋग्वैदिक काल में बाल विवाह, तलाक, सतीप्रथा, पर्दा प्रथा का प्रचलन नही था ऋग्वैदिक काल में विधवा विवाह एवं नियोग प्रथा का प्रचलन था|

० सोम नामक पदार्थ की चर्चा ऋग्वेद के नौंवे मण्डल में है|

० ऋग्वैदिक आर्यों का मुख्य पेशा पशुचारण था|

० ऋगवेद में मुद्रा के रूप में निष्क और शतमान की चर्चा मिलाती है |

० ऋग्वेद में कृषि का उल्लेख २४ बार हुआ |

० ऋग्वैदिक आर्यों को पाँच ऋतुओ का ज्ञान था|

० ऋग्वैदिक काल के सबसे महत्वपूर्ण देवता को ‘पुरन्दर’ कहा गया है|

० ऋग्वैदिक काल के दूसरे महत्वपूर्ण देवता अग्नि देवताओं और मनुष्यों के बीच मध्यस्थ थे|

० ऋग्वेद में वरुण देवता को नैतिक नियमो का संरक्षक बताया गया है|

० ऋग्वैदिक धर्म कि दृष्टि मानवीय तथा इहलौकिक थी|

० 800 ई.पू. के आस-पास गंगा यमुना दोआब में अतरंजीखेडा से पहली बार कृषि से सम्बन्धित लौह उपकरण के साक्ष्य मिले है|

० ऐतरेय ब्राह्मण में चारों वर्णों के कर्तव्यो का वर्णन मिलता है|

० उत्तरवैदिक ग्रन्थों में श्याम अयस (लोहे) की चर्चा मिलती है|

० सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण में कृषि की समस्त प्रक्रियाओं का वर्णन मिलता है सामवेद को भारतीय संगीतशास्त्र पर प्राचीनतम पुस्तक माना जाता है|

० यजुर्वेद गद्य एवं पद्य में लिखित है|

० अथर्ववेद में तन्त्र-मन्त्र का संकलन है|

० गृह्य सूत्र में सोलह प्रकार के संस्कार तथा आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख है।

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