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👁‍🗨 हर साल 12 जून को बाल श्रम के खात्मे के लिए विश्व बालश्रम विरोधी दिवस मनाया जाता हैं. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट के अनुसार आज भी दुनियाभर में करीब 15.2 करोड़ बच्चे मजदूरी करने को मजबूर हैं. इनमें से अधिकतर बदतर हालात में काम कर रहे हैं.

🤔 जबकि भारत में जनगणना 2011 की रिपोर्ट बताती है कि देश में एक करोड़ से ज्यादा बाल मजदूर हैं.

😥 बढ़ती चाइल्ड ट्रैफिकिंग और बच्चे
● हर साल हजारों बच्चे दुर्व्यापार (ट्रैफिकिंग) करके एक राज्य से दूसरे राज्यों में ले जाए जाते हैं. सीमापार ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी गरीब देशों नेपाल और बांग्लादेश से भी भारत में ऐसे बच्चे हजारों की संख्या में लाए जा रहे हैं. जबरिया बाल मजदूरी, गुलामी और बाल वेश्यावृत्ति आदि के लिए इन बच्चों को खरीदा और बेचा जाता है.

● नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संगठन बचपन बचाओ आंदोलन(बीबीए) का मानना है कि तकरीबन 7 से 8 करोड़ बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा से वंचित हैं.

❗ क्या है कानून!
● हमारे देश में बाल श्रम के खिलाफ कानून भी है. बालक और कुमार श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम-1986 में साल 2016 में परिवर्तन कर इसे और मजबूत और प्रभावशाली बनाया गया.

● बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण अधिनियम 2018) में भी आमूल-चूल परिवर्तन किया गया है.

● बच्चों को शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म के बेहतर इस्तेमाल के लिए ‘पेंसिल’ पोर्टल लांच किया है.

🤝 मिलकर करना होगा काम!
ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जो बाल मजदूरी से मुक्ति के पश्चात पढ़ाई कर इंजीनियर, वकील,शिक्षक आदि बने हैं. अगर सरकारी, गैर-सरकारी, पंचायती व्यवस्था और कानून को लागू करने वाली एजेंसियां और आम नागरिक एक साथ मिलकर काम करें, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत से बाल मजदूरी सदा के लिए खत्म हो जाएगी.

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