रक्षाबंधन का विज्ञान ।।

हिन्दू सनातन धर्म पूर्णतया विज्ञान आधारित धर्म है और इसके जितने भी तीज त्योहार है उनका वैज्ञानिक कारण है जिसे हमारे पूर्वजों ने रीति रिवाज के आवरण में लपेट दिया है ताकि हम जाने अनजाने में भी उनका लाभ लेते रहे .....


रक्षाबंधन मनाने के पीछे वैज्ञानिक कारण ..........

👉👉 हमारे शरीर में कई ऐसे प्रेशर प्वाइंट होते हैं जिनकी मदद से रोगों का उपचार किया जा सकता है। शरीर के हर अंग में कई प्वाइंट होते हैं जिनको दबाने से रोगों का इलाज संभव हो सकता है। आपके हाथों और बांहों में भी ऐसे ही कई प्वाइंट्स हैं जो आपको निरोग रखने में मददगार हैं।
 ये प्रेशर प्‍वाइंट्स एक्‍यूप्रेशर की दृष्टि से काफी महत्‍वपूर्ण होते हैं। और आपको कई बीमारियों से बचा सकते हैं। इन प्‍वाइंट्स पर सही दबाव डालकर आप जुकाम, साइनस, श्वसन में परेशानी, चिंता, और पाचन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। ये प्‍वाइंट्स हमारे दोनों हाथों में होते हैं।

👉👉 पहले दो प्‍वाइंट्स का असर हमारे फेफड़ों संबंधी रोगों को दूर करने में मदद करते हैं और यह हमारी कलाइयों में स्थित होते हैं।

👉👉 प्‍वाइंट LU 7 हाथ और कलाई के जोड़ पर होता है। इस प्‍वाइंट पर दबाव डालने से आपको ठंड व जुकाम संबंधी लक्षणों जैसे छींक, ठंड, नाक बहना और गले की सूजन आदि से राहत मिलती है। दूसरा प्‍वाइंट LU 9 उस स्‍थान पर होता है, जहां से आप नाड़ी महसूस करते हैं। इस प्‍वाइंट पर सही दबाव डालने से खांसी, अस्‍थमा और सांस उखड़ने की समस्‍या से राहत मिलती है।

👉👉 इसके साथ ही हमारी बाजुओं में PC3 प्‍वांइट होता है। यह प्‍वांइट वहां होता है जहां कोहनी मुड़ती है। यह प्‍वाइंट पर जोर डालने से पेट और हाजमे संबंधी समस्‍याओं से बचा सकता है। इसके सा‍थ तनाव और चिंता, और छाती में उमस आदि को दूर किया जा सकता है।

👉👉 बाजु के निचले हिस्‍से में PC 6 प्‍वाइंट होता है। इस प्‍वाइंट को कलाई क्रीज से ऊपर की ओर जाते हुए कलाई के बीचों बीच पाया जाता है। यह प्‍वाइंट वहां होता है जहां आपकी बाजु सबसे मोटी होती है। यह प्‍वाइंट तनाव, पाचन क्रिया, मतली और कार्पल टनल सिंड्रोम जैसी समस्‍याओं को दूर किया जा सकता है।

HT 7 भी कलाई की क्रीज पर होता है। यह प्‍वाइंट कलाई की हड्डी के पास होता है। यह प्‍वाइंट तनाव, अनिद्रा, हार्ट पलपरेशन और अवसाद से दूर करने में मदद करता है।

👉👉 आप ऊपर की पिक में देखिए आपको मिलेगा की point no.5,6,7 कलाई में होते है जिसपे जब हम रक्षासूत्र(राखी)बांधते है तो हम अनजाने में ही उस प्रेशर पॉइन्ट को प्रेस करते है जिससे हमारी हेल्थ में बदलाव होता है।

👉👉 विशेष - वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो स्वास्थ्य के अनुसार रक्षा सूत्र बांधने से कई बीमारियां दूर होती है, जिसमें कफ, पित्त आदि शामिल है. शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है, अतः यहां रक्षा सूत्र बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है. ऐसी भी मान्यता है कि इसे बांधने से बीमारी अधिक नहीं बढती है. ब्लड प्रेशर, हार्ट एटेक, डायबीटिज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिये मौली बांधना हितकर बताया गया है।।

रक्षाबन्धनम्

रक्षाबंधनस्य पर्व श्रावणमासस्य पूर्णिमायां प्रतिवर्षम् आमान्यते। श्रावणमासस्य पूर्णिमायामायोज्यमानं पर्व इदं श्रावणीपर्व इति नाम्ना अपि ज्ञायते। प्राचीनकाले आश्रमवासिनः ऋषयः मुनयश्च श्रावणमासे स्वाध्यायं यज्ञादिकं च कुर्वन्ति स्म। पूर्णिमायाः दिवसे मासयज्ञस्य पूर्णाहुतिः तथा च तर्पणकर्म भवति स्म । साकमेव अस्मिन् अवसरे ब्रह्मचारिभिः नूतनानि यज्ञोपवीतानि धार्यन्ते । यज्ञान्ते रक्षासूत्रमपि गुरुभिः बध्यते स्म। गुरुजनाः अस्मात् दिवसादेव शिक्षासत्रस्यापि समारम्भं कृतवन्तः। गुरवः आशीर्वादरूपेण पीतवर्णस्य रक्षासूत्रमपि अभिमन्त्र्य ब्रह्मचारिणां हस्ते बध्नन्ति स्म। एतस्मात् कारणादेव भारते अयमुत्सवः श्रावणीपर्व , ऋषितर्पणं , उपाकर्म, रक्षाबंधनमिति नामभिरपि ज्ञायते। हिन्दीभाषायाः राखी इति शब्दः संस्कृतभाषाया रक्षा इति शब्देन गृह्यते। बन्धन इत्यस्य आशयः संस्कृतशब्दस्य बन्धनमिति शब्दादेवास्ति। एवं रक्षाबंधनमिति तत्सूत्रं स्यात् यद्यस्य हस्ते तत्सूत्रं (राखी )बध्नीयात् तत्पुनः सः जनस्तस्य बन्धनकर्तुः रक्षायै सन्नद्धो भवेत् । वर्तमानसमये अस्मिन् पर्वणि भगिन्यः स्वभ्रातुः हस्ते रक्षासूत्रं बध्नन्ति मिष्टान्नं च खादयन्ति। भ्रातारश्च यथायोग्यं श्रद्धापूर्वकं ताभ्यः स्वभगिनीभ्यः वस्त्रादि- उपहारान् दत्त्वा तासां स्वागतं सत्कारं च कुर्वन्ति। वस्तुतः उत्सवोऽयं भ्रातृणां भगिनीनां च प्रेम्णः उल्लासस्य च प्रतीको (प्रतीकं ) वर्तते।

 (डॉ नारायणदेवश्शास्त्री भरतपुरम्)

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