प्रभु में हो विश्वास - आस्तिक
न माने प्रभु वही - नास्तिक
न माने प्रभु वही - नास्तिक
कभी न पहले - अभूतपूर्व
शुभ कार्य का समय - मुहूर्त
शुभ कार्य का समय - मुहूर्त
आसमान में उड़ते - नभचर
पानी मे रहते हैं - जलचर
पानी मे रहते हैं - जलचर
धरती पर रहते हैं - थलचर
जल-थल दोनों रहें - उभयचर
जल-थल दोनों रहें - उभयचर
स्थिर रहे वही - स्थावर
रात में घूमे वही - निशाचर
रात में घूमे वही - निशाचर
कम बोले वो है - मितभाषी
मीठा बोले वो - मृदुभाषी
मीठा बोले वो - मृदुभाषी
साहस जिसमें वही - साहसी
रण में मरता पाये - वीरगति
रण में मरता पाये - वीरगति
बेहद अच्छा होता - श्रेष्ठ
जितना चाहें वही - यथेष्ट
जितना चाहें वही - यथेष्ट
माने जो उपकार - कृतज्ञ
न माने उपकार - कृतघ्न
न माने उपकार - कृतघ्न
कभी न बूढ़ा होय - अजर
कभी मरे न वही - अमर
कभी मरे न वही - अमर
जिसमें रस हो वही - सरस
रस न हो तो है - नीरस
रस न हो तो है - नीरस
धीरज न हो वही - अधीर
सीमा न हो वही - असीम
सीमा न हो वही - असीम
धन न हो तो है - निर्धन
सब गुण - सर्वगुणसम्पन्न
सब गुण - सर्वगुणसम्पन्न
साथ पढ़े वो है - सहपाठी
विद्या पाता है - विद्यार्थी
विद्या पाता है - विद्यार्थी
चिन्ता में डूबा है - चिन्तित
निश्चय न हो वही - अनिश्चित
निश्चय न हो वही - अनिश्चित
कठिनाई से मिलता - दुर्लभ
आसानी से मिले - सुलभ
आसानी से मिले - सुलभ
आँख के आगे है - प्रत्यक्ष
दिखे नहीं जो वो - अदृश्य
दिखे नहीं जो वो - अदृश्य
हिंसा करने वाला - हिंसक
रक्षा में रत है - अंगरक्षक
रक्षा में रत है - अंगरक्षक
सच प्यारा वो - सत्यप्रिय
सबका प्रिय वो - सर्वप्रिय
सबका प्रिय वो - सर्वप्रिय
सहन न हो वो - असहनीय
कहा न जाये - अकथनीय
कहा न जाये - अकथनीय
आने वाला है - आगामी
जिसका पता न हो - अज्ञात
मात-पिता न वही - अनाथ
मात-पिता न वही - अनाथ
बहुत कीमती वो - बहुमूल्य
परे मूल्य से वही - अमूल्य
परे मूल्य से वही - अमूल्य
सच का आग्रह - सत्याग्रह
बेहद बारिश है - अतिवृष्टि
कम बारिश है - अल्पवृष्टि
कम बारिश है - अल्पवृष्टि
नहीं हो बारिश - अनावृष्टि
ज्ञानी स्त्री होती - विदुषी
ज्ञानी स्त्री होती - विदुषी
खुद की हत्या - आत्महत्या
न माने आदेश - अवज्ञा
न माने आदेश - अवज्ञा
भेद न पायें वही - अभेद्य
कानून के विरुद्ध - अवैध
कानून के विरुद्ध - अवैध
दिल से हो जो वही - हार्दिक
सब लोगों के लिए - सार्वजनिक
सब लोगों के लिए - सार्वजनिक
जुड़ा देह से वो है - दैहिक
प्रतिदिन होता वो है - दैनिक
प्रतिदिन होता वो है - दैनिक
पंद्रह दिन में वही - पाक्षिक
वर्ष में एक बार - वार्षिक
वर्ष में एक बार - वार्षिक
एक बार माह में - मासिक
हफ्ते में एक - साप्ताहिक
हफ्ते में एक - साप्ताहिक
जहाँ मिलें भू-गगन - क्षितिज
निज नूतन रचना - मौलिक
निज नूतन रचना - मौलिक
जिसमें श्रद्धा वह - श्रद्धालु
दया हो जिसमें वही - दयालु
दया हो जिसमें वही - दयालु
अपना हित ही सोचे - स्वार्थी
शरण चाहता वो - शरणार्थी
शरण चाहता वो - शरणार्थी
नहीं सामने वही - परोक्ष
जल्दी खुश वो - आशुतोष
जल्दी खुश वो - आशुतोष
ऊँची इच्छा - महत्त्वाकाँक्षा
शुभ कामना - शुभाकाँक्षा
शुभ कामना - शुभाकाँक्षा
जिसको न हो डर वो - निर्भय
सम दृष्टि रखता - समदर्शी
दूर की सोचे - दूरदर्शी
दूर की सोचे - दूरदर्शी
जीवन-भर - जीवनपर्यन्त
फूलों का रस है - मकरन्द
फूलों का रस है - मकरन्द
अच्छी किस्मत वो - खुशकिस्मत
बुरे भाग्य वाला - बदकिस्मत
बुरे भाग्य वाला - बदकिस्मत
मांस खाये वो - मांसाहारी
सब कुछ खा ले - सर्वाहारी
सब कुछ खा ले - सर्वाहारी
सिर्फ खाये फल - फलाहारी
रहे दूध पर - दुग्धाहारी
रहे दूध पर - दुग्धाहारी
कम खाये वो - अल्पाहारी
उसे ही कहते - मिताहारी
उसे ही कहते - मिताहारी
सब्ज़ी फल ले - शाकाहारी
चले शीघ्रता से - द्रुतगामी
चले शीघ्रता से - द्रुतगामी
जल से घिरा स्थल है - द्वीप
तीन ओर जल वो - प्रायद्वीप
तीन ओर जल वो - प्रायद्वीप
मार्ग हेतु भोजन - पाथेय
जो पदार्थ पी सकते - पेय
जो पदार्थ पी सकते - पेय
पशु-समान बर्ताव - पाशविक
श्रम बदले धन - पारिश्रमिक
श्रम बदले धन - पारिश्रमिक
लज्जा न हो वो - निर्लज्ज
नहीं विकार हो - निर्विकार
नहीं विवाद वो - निर्विवाद
नहीं विवाद वो - निर्विवाद
नहीं कोई बाधा - निर्बाध
न हो निज हित वो - निःस्वार्थ
न हो निज हित वो - निःस्वार्थ
जिसका पति जीवित वो - सधवा
जिसका पति मर जाये - विधवा
जिसका पति मर जाये - विधवा
जिसकी कोई न इच्छा - निस्पृह
अनुचित आग्रह बने - दुराग्रह
अनुचित आग्रह बने - दुराग्रह
कुछ न उगले भूमि - बंजर
कृषि हो अच्छी भूमि - उर्वर
कृषि हो अच्छी भूमि - उर्वर
चार पैर वाला - चौपाया
गायों का निवास - गौशाला
गायों का निवास - गौशाला
अच्छे कुल का व्यक्ति - कुलीन
काम में डूबा वो - तल्लीन
काम में डूबा वो - तल्लीन
जहाँ ढलें सिक्के - टकसाल
हड्डियों का ढाँचा - कंकाल
हड्डियों का ढाँचा - कंकाल
गीत गाये जो वो है - गायक
नायक का दुश्मन - खलनायक
नायक का दुश्मन - खलनायक
कई रूप धरे - बहुरूपिया
दिन का कार्यक्रम है - दिनचर्या
दिन का कार्यक्रम है - दिनचर्या
दो में निष्ठा - उभयनिष्ठ
जिस पर चिह्न लगा - चिह्नित
जिस पर चिह्न लगा - चिह्नित
स्थान बदलने वाला - जंगम
नदी जहाँ से निकले - उद्गम
नदी जहाँ से निकले - उद्गम
जैसा कोई न वो - अद्वितीय
इन्द्रियाँ वश में रखे - जितेंद्रिय
इन्द्रियाँ वश में रखे - जितेंद्रिय
पति-पत्नी का जोड़ा - दम्पति
कविता रचता होता है - कवि
कविता रचता होता है - कवि
जिससे प्रेम वही - प्रेमास्पद
मीठा बोले वही - प्रियंवद
मीठा बोले वही - प्रियंवद
नीति के अनुकूल वो - नैतिक
वेदों से संबंधित - वैदिक
वेदों से संबंधित - वैदिक
अच्छा पढ़ा-लिखा - सुशिक्षित
नीचे रेखा वो - रेखांकित
नीचे रेखा वो - रेखांकित
रखी अमानत वस्तु - धरोहर
मन को हर ले वही - मनोहर
मन को हर ले वही - मनोहर
मन की इच्छा - मनोकामना
माँग किसी से वही - याचना
माँग किसी से वही - याचना
चार भुजाएं वही - चतुर्भुज
बिना गुणों का वो है - निर्गुण
बिना गुणों का वो है - निर्गुण
छोटा भाई होता - अनुज
जिसकी पत्नी मरे - विधुर
जिसकी पत्नी मरे - विधुर
तीन नयन वाला - त्रिनेत्र
बड़ा उम्र में वो है - ज्येष्ठ
बड़ा उम्र में वो है - ज्येष्ठ
पका हुआ जो वो - परिपक्व
छूने योग्य न हो - अस्पृश्य
छूने योग्य न हो - अस्पृश्य
करे इलाज जो वही - चिकित्सक
नहीं पढ़ा हो वो है - अनपढ़
नहीं पढ़ा हो वो है - अनपढ़
जो पढ़-लिख ले वही - साक्षर
नहीं हो अक्षर-ज्ञान - निरक्षर
नहीं हो अक्षर-ज्ञान - निरक्षर
कम जाने वो है - अल्पज्ञ
नही ज्ञान कुछ वो है - अज्ञ
नही ज्ञान कुछ वो है - अज्ञ
ज्ञान विशेष रखे - विशेषज्ञ
ताक़त-भर है - यथाशक्य
ताक़त-भर है - यथाशक्य
मर्म समझता वो - मर्मज्ञ
बहुविध ज्ञान वही - बहुज्ञ
अच्छा बेटा वही - सुपुत्र
अच्छा बेटा वही - सुपुत्र
भक्त पिता का - पितृभक्त
व्यर्थ करे व्यय - फिजूलखर्च
व्यर्थ करे व्यय - फिजूलखर्च
कोई शुल्क न वो - निःशुल्क
जल्द नष्ट हो - क्षणभंगुर
जल्द नष्ट हो - क्षणभंगुर
सलाह दे वो - सलाहकार
परहित कार्य - परोपकार
परहित कार्य - परोपकार
दोपहर से पहले - पूर्वाह्न
दोपहर के बाद - अपराह्न
दोपहर के बाद - अपराह्न
फेंकें जो हथियार - अस्त्र
हाथ रहे हथियार - शस्त्र
हाथ रहे हथियार - शस्त्र
पंद्रह दिन का समय - पक्ष
निपुण कार्य में वही - दक्ष
निपुण कार्य में वही - दक्ष
मना मरीज को खाद्य - अपथ्य
किसी भी गुट में नहीं - तटस्थ
किसी भी गुट में नहीं - तटस्थ
कमी अंग में वो - विकलांग
बोले अधिक वही - वाचाल
बोले अधिक वही - वाचाल
गलती पर दुःख - पश्चात्ताप
गहराई न पता - अथाह
गहराई न पता - अथाह
ज्ञान की इच्छा वह - जिज्ञासु
सहन करे जो वही - सहिष्णु
सहन करे जो वही - सहिष्णु
चले मार्ग में वही - पथिक
गिन न पायें वो - अगणित
गिन न पायें वो - अगणित
नहीं जानता वो - अनभिज्ञ
गुरु से सीखे वो है - शिष्य
गुरु से सीखे वो है - शिष्य
बदले सदा - परिवर्तनशील
बीता समय कहलाये - अतीत
बीता समय कहलाये - अतीत
हाथ में न हथियार - निहत्था
महान आत्मा वही - महात्मा
महान आत्मा वही - महात्मा
साध सकें न वही - असाध्य
सिद्ध कठिनता से - दुस्साध्य
सिद्ध कठिनता से - दुस्साध्य
गीत रचे वो - गीतकार
गुजर-बसर करना - निर्वाह
गुजर-बसर करना - निर्वाह
रचना करता वही - रचयिता
केवल पति में राग - पतिव्रता
केवल पति में राग - पतिव्रता
सबसे आगे रहे - अग्रणी
कमर का गहना वही - करधनी
कमर का गहना वही - करधनी
टाल सकें न वो - अनिवार्य
छोड़ सकें न - अपरिहार्य
छोड़ सकें न - अपरिहार्य
खबरें भेजे - संवाददाता
जिसे ज्ञान हो वो है - ज्ञाता
जिसे ज्ञान हो वो है - ज्ञाता
बड़ा भाई होता है - अग्रज
संस्कार जिसमें वो - संस्कृत
संस्कार जिसमें वो - संस्कृत
रोजी-रोटी-कार्य - आजीविका
छोटी उँगली है - कनिष्ठिका
छोटी उँगली है - कनिष्ठिका
छोटी उँगली निकट - अनामिका
बीच वाली उँगली - मध्यमा
बीच वाली उँगली - मध्यमा
दर्पण-जल-छाया - प्रतिबिम्ब
कमल-सा मुख है - मुखारविंद
कमल-सा मुख है - मुखारविंद
बहुत समय रहे - चिरस्थाई
जिस पर जिम्मा - उत्तरदायी
जिस पर जिम्मा - उत्तरदायी
बहुत काल जिये - चिरंजीवी
काम हो लिखना वो - मसिजीवी
काम हो लिखना वो - मसिजीवी
अपने पथ को छोड़े - विचलित
निज स्थान से हटे - विस्थापित
निज स्थान से हटे - विस्थापित
छपा हुआ जो वो है - मुद्रित
जैसा उचित वही - यथोचित
जैसा उचित वही - यथोचित
कथा स्वयं की - आत्मकथा
रीति पुरानी वही - प्रथा
रीति पुरानी वही - प्रथा
कहा जो ऊपर - उपर्युक्त
लगा आरोप वही - अभियुक्त
लगा आरोप वही - अभियुक्त
हो अभ्यास वही - अभ्यस्त
देश में निष्ठा - देशभक्त
देश में निष्ठा - देशभक्त
सौ का संग्रह बने - शतक
दस वर्षों को कहें - दशक
दस वर्षों को कहें - दशक
राजा से संबंधित - शाही
दांव लगाकर खेलें - बाजी
दांव लगाकर खेलें - बाजी
नहीं ठौर वो - खानाबदोश
नहीं दोष तो है - निर्दोष
नहीं दोष तो है - निर्दोष
शिक्षा देने वाला - शिक्षक
शासन करने वाला - शासक
शासन करने वाला - शासक
कीड़े मारे - कीटनाशक
मार सके जो वो है - मारक
मार सके जो वो है - मारक
करे भलाई - परोपकारी
आज्ञा माने - आज्ञाकारी
आज्ञा माने - आज्ञाकारी
भरे न जल्दी घाव - नासूर
बहुत दूर हो वही - सूदूर
बहुत दूर हो वही - सूदूर
विश्वास-योग्य - विश्वासपात्र
अच्छा ग्रहीता वही - सुपात्र
अच्छा ग्रहीता वही - सुपात्र
कठिन रास्ता होता - दुर्गम
ममता न हो वो है - निर्मम
ममता न हो वो है - निर्मम
जिसके पार दिखे - पारदर्शी
साथ काम करता - सहकर्मी
साथ काम करता - सहकर्मी
जो रथ हाँके वही - सारथी
खुद पर काबू वही - संयमी
खुद पर काबू वही - संयमी
चक्र हाथ में वो - चक्रपाणि
टकराकर ध्वनि लौटे - प्रतिध्वनि
पेट की अग्नि है - जठराग्नि
पेट की अग्नि है - जठराग्नि
सच बोले वो - सत्यवादी
सब जगह वो - सर्वव्यापी
सब जगह वो - सर्वव्यापी
जो हित चाहे वही - हितैषी
हित-अनहित पहचाने - विवेकी
हित-अनहित पहचाने - विवेकी
शुद्ध-आचरण-रीति - संस्कृति
खाल सर्प की बने - केंचुली
खुद पर निर्भर - स्वावलंबी
खुद पर निर्भर - स्वावलंबी
ख़र्च करे कम वो - मितव्ययी
दया बहुत वो - दयानिधि
दया बहुत वो - दयानिधि
शरण में आया वो - शरणागत
हाथी हाँके वही - महावत
हाथी हाँके वही - महावत
चुप रह देखे - मूकदर्शक
पथ दिखलाता - मार्गदर्शक
पथ दिखलाता - मार्गदर्शक
काम में तत्पर वो है - कर्मठ
गोद लिया बेटा है - दत्तक
गोद लिया बेटा है - दत्तक
छूने से फैले - संक्रामक
घूमे यात्री वही - पर्यटक
घूमे यात्री वही - पर्यटक
जिसका कोई न अर्थ - निरर्थक
जिसमें तीर रखें वो - तरकश
जिसमें तीर रखें वो - तरकश
दुःख, भय से पीड़ित - कातर
घूम-घूमकर जिये - यायावर
घूम-घूमकर जिये - यायावर
होगा नष्ट वही है - नश्वर
हानि न जिससे वही - निरापद
जिसे देखकर डरें - भयानक
जिसे देखकर डरें - भयानक
जिस पर झगड़ा - विवादास्पद
सिर्फ रेत हो वही - मरुस्थल
जिसकी उपमा न हो - अनुपम
जिसकी उपमा न हो - अनुपम
रहा सदा से वही - सनातन
हँसी दिलाता नाटक - प्रहसन
हँसी दिलाता नाटक - प्रहसन
जन्म हो फिर से - पुनर्जन्म
अंत नहीं हो वही - अनन्त..
अंत नहीं हो वही - अनन्त..
जंगल में फैलनेवाली आग - दावाग्नि, दावानल
समुद्र में लगने वाली आग - बड़वानल
जो सपना दिन में देखा जाए - दिवास्वप्न (दिन के सपने )
जिसे कठिनाई से जाना जा सके - दुर्ज्ञेय
जो कठिनाई से समझ में आता हो - दुर्बोध
अर्द्धरात्रि का समय - निशीथ
रंगमंच पर पर्दे के पीछे का स्थान - नेपथ्य
आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लेने वाला - नैष्ठिक
नाटक का पर्दा गिरना - पटाक्षेप
रंगमंच का पर्दा - यवनिका
जो उत्तर न दे सके - निरुत्तर
केवल दूध पर जीवित रहने वाला - पयोहारी
शरणागत की रक्षा करने वाला - प्रणतपाल
एक बार कही हुई बात को दोहराते रहना - पिष्टपेषण
जो पूछने योग्य हो - पृष्टव्य
प्रमाण द्वारा सिद्ध करने योग्य - प्रमेय
रात का भोजन - ब्यालू/ रात्रिभोज
जिसकी आंखें मगर जैसी हो - मकराक्ष
जिस स्त्री की आंखें मछली के समान हो - मीनाक्षी
जिस पुरुष की आंखें मछली के समान हो - मीनाक्ष
हरिण के नेत्रों-सी आंखों वाली - मृगनयनी (नयन हिरन से वो)
मोक्ष प्राप्त करने की इच्छा - मुमुक्षा
मरने की इच्छा - मुमूर्षा
युद्ध करने की इच्छा - युयुत्सा
सृजन करने की इच्छा - सिसृक्षा
खुले हाथ से दान देने वाला - मुक्तहस्त
माता की हत्या करने वाला - मातृहन्ता
जिसने मृत्यु को जीत लिया हो - मृत्युंजय (मौत को जीते वो)
वह कन्या जिसका विवाह करने का वचन दे दिया गया हो - वाग्दत्ता
व्याकरण का ज्ञाता - वैयाकरण
शत्रु का नाश करने वाला - शत्रुघ्न (दुश्मन नष्ट करे)
जिसका कोई आदि और अंत न हो - शाश्वत (अनादि अनंत वही है)
जो सब कुछ जानता हो - सर्वज्ञ (सब कुछ जाने वो)
सब कुछ पाने वाला - सर्वलब्ध
जो गुप्त रूप से निवास करता हो - छद्मवासी
दिन और रात के बीच का समय - गोधूलि वेला
जिसका अर्थ स्वयं ही सिद्ध है - सिद्धार्थ
वह व्यक्ति जिसका ज्ञान अपने ही स्थान तक सीमित है - कूपमंडूक
भोजन करने के बाद का बचा हुआ अन्न/जूठन - उच्छिष्ट
जिसे सूँघा न जा सके - आघ्रेय
वह कवि जो तत्काल कविता कर सके - आशुकवि
जिसका कोई शत्रु न जन्मा हो - अजातशत्रु
जो इंद्रियों (गो) द्वारा न जाना जा सके - अगोचर
किसी बात को अत्यधिक बढाकर कहना - अतिशयोक्ति (बढ़-चढ़ बात)
जिसे बुलाया न गया हो - अनाहूत
जो सबके मन की बात जनता हो - अंतर्यामी (दिल की जाने)
जो मापा न जा सके - अपरिमेय
किसी वस्तु को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा - अभीप्सा
आवश्यकता से अधिक धन का ग्रहण न करना - अपरिग्रह (नहीं हो संचय)
जो सपना दिन में देखा जाए - दिवास्वप्न (दिन के सपने )
जिसे कठिनाई से जाना जा सके - दुर्ज्ञेय
जो कठिनाई से समझ में आता हो - दुर्बोध
अर्द्धरात्रि का समय - निशीथ
रंगमंच पर पर्दे के पीछे का स्थान - नेपथ्य
आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लेने वाला - नैष्ठिक
नाटक का पर्दा गिरना - पटाक्षेप
रंगमंच का पर्दा - यवनिका
जो उत्तर न दे सके - निरुत्तर
केवल दूध पर जीवित रहने वाला - पयोहारी
शरणागत की रक्षा करने वाला - प्रणतपाल
एक बार कही हुई बात को दोहराते रहना - पिष्टपेषण
जो पूछने योग्य हो - पृष्टव्य
प्रमाण द्वारा सिद्ध करने योग्य - प्रमेय
रात का भोजन - ब्यालू/ रात्रिभोज
जिसकी आंखें मगर जैसी हो - मकराक्ष
जिस स्त्री की आंखें मछली के समान हो - मीनाक्षी
जिस पुरुष की आंखें मछली के समान हो - मीनाक्ष
हरिण के नेत्रों-सी आंखों वाली - मृगनयनी (नयन हिरन से वो)
मोक्ष प्राप्त करने की इच्छा - मुमुक्षा
मरने की इच्छा - मुमूर्षा
युद्ध करने की इच्छा - युयुत्सा
सृजन करने की इच्छा - सिसृक्षा
खुले हाथ से दान देने वाला - मुक्तहस्त
माता की हत्या करने वाला - मातृहन्ता
जिसने मृत्यु को जीत लिया हो - मृत्युंजय (मौत को जीते वो)
वह कन्या जिसका विवाह करने का वचन दे दिया गया हो - वाग्दत्ता
व्याकरण का ज्ञाता - वैयाकरण
शत्रु का नाश करने वाला - शत्रुघ्न (दुश्मन नष्ट करे)
जिसका कोई आदि और अंत न हो - शाश्वत (अनादि अनंत वही है)
जो सब कुछ जानता हो - सर्वज्ञ (सब कुछ जाने वो)
सब कुछ पाने वाला - सर्वलब्ध
जो गुप्त रूप से निवास करता हो - छद्मवासी
दिन और रात के बीच का समय - गोधूलि वेला
जिसका अर्थ स्वयं ही सिद्ध है - सिद्धार्थ
वह व्यक्ति जिसका ज्ञान अपने ही स्थान तक सीमित है - कूपमंडूक
भोजन करने के बाद का बचा हुआ अन्न/जूठन - उच्छिष्ट
जिसे सूँघा न जा सके - आघ्रेय
वह कवि जो तत्काल कविता कर सके - आशुकवि
जिसका कोई शत्रु न जन्मा हो - अजातशत्रु
जो इंद्रियों (गो) द्वारा न जाना जा सके - अगोचर
किसी बात को अत्यधिक बढाकर कहना - अतिशयोक्ति (बढ़-चढ़ बात)
जिसे बुलाया न गया हो - अनाहूत
जो सबके मन की बात जनता हो - अंतर्यामी (दिल की जाने)
जो मापा न जा सके - अपरिमेय
किसी वस्तु को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा - अभीप्सा
आवश्यकता से अधिक धन का ग्रहण न करना - अपरिग्रह (नहीं हो संचय)
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