▪️ मुख्य बिंदु:
• इस बैठक COVID-19 प्रबंधन और महामारी की प्रतिक्रिया से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।
• सदस्य देश महामारी के संबंध में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करेंगे।
▪️ पृष्ठभूमि :
मार्च 2020 में सार्क क्षेत्र के राष्ट्राध्यक्षों के एक वीडियो सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनावायरस आपातकालीन निधि COVID-19 संकट का भी प्रस्ताव किया था।
▪️ कोरोनावायरस इमरजेंसी फंड :
• COVID-19 महामारी की प्रतिक्रिया के लिए SAARC सदस्यों द्वारा कोरोनावायरस आपातकालीन निधि की स्थापना की गई थी।
• दक्षिण एशियाई क्षेत्र में COVID-19 महामारी से जुड़े जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से यह आपातकालीन निधि बनाई गई थी।
• भारत ने निधि के लिए 10 मिलियन का योगदान करने का प्रस्ताव दिया था।
• सार्क के अन्य सदस्य देशों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित फंड बनाने के इस कदम का समर्थन किया।
▪️ पड़ोसियों को भारत का समर्थन :
भारत COVID-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे है। भारत सबसे ज्यादा टीकाकरण करने वाला देश बनकर उभरा है। इसलिए, भारत स्वदेशी रूप से विकसित COVID-19 टीकों को उपहार के रूप में या वाणिज्यिक रूप से देशों को उपलब्ध कराने में भी सबसे आगे है। भारत ने हाल ही में अफगानिस्तान को COVID-19 टीकों की पांच लाख खुराक, बांग्लादेश को 20 लाख खुराक, म्यांमार को 17 लाख खुराक, श्रीलंका को पांच लाख खुराक, भूटान को 1.5 लाख खुराक, मॉरीशस और मालदीव के प्रत्येक को एक लाख खुराक का तोहफा दिया है।
▪️ सार्क :
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) समूह में पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मालदीव, भूटान, श्रीलंका और नेपाल जैसे देश शामिल हैं। इसकी स्थापना 8 दिसंबर 1985 को हुई थी। इसका मुख्यालय काठमांडू, नेपाल में है।
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