➤ दाब का मात्रक न्यूटन/मीटर2 है | दाब एक अदिश (Scalar) राशि है । इसका विमीयसूत्र [ML-1T-2 ] है । द्रवों के दाब को पास्कल (Pascal) नामक मात्रक में भी नापते हैं | 1 पास्कल = न्यूटन/मीटर2
➤ पास्कल का नियम (Pascal's Law): किसी बर्तन में बन्द द्रव के किसी भाग पर आरोपित दाब द्रव द्वारा सभी दिशाओं में समान परिमाण में संचारित कर दिया जाता है | ब्रह्मांड का द्रव दाब गैस इसी सिद्धान्त पर कार्य करता हैं ।
➤ द्रव का उत्क्षेप (Upthrust of a Liquid): जब कोई वस्तु किसी द्रव में डुबोई जाती है, तो द्रव उस पर एक बल ऊपर की ओर लगाता है जिसे उस द्रव का उद्क्षेप (उछाल) कहते हैं | यह उद््षेप वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है तथा हटाए गए द्रव के गुरुत्व केंद्र से होकर ऊर्ध्वाधर ऊपर की दिशा में कार्य करता है । इस बिन्दु को द्रव का उत्प्लावन केंद्र कहते हैं ।
➤ आर्कमिडीज का सिद्धान्त (Principle of Archimedes): जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूर्ण पा आंशिक रूप से डुबाई जाती है, तो उसके भार में कुछ कमी प्रतीत होती है तथा भार में यह आभासी कमी उस वस्तु के द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होती है,इसे आर्कमिडीज का सिद्धान्त कहते हैं |
➤ प्लवन की सिद्धान्त (Principle of Floatation): इस सिद्धान्त के अनुसार प्लवन करने वाली वस्तु का भार उस वस्तु द्वारा हटाए गए भार के बराबर होता है |
➤ प्लवन करती हुई वस्तु का आभासी भार शून्य होता है ।
➤ प्लवन करती हुई वस्तु के सन्तुलन के लिए गुरुत्व केंद्र (G) तथा उत्प्लावन केंद्र (B) एक ऊर्ध्व रेखा में स्थित होने चाहिए ।
➤ आपेक्षित घनत्व (Relative Density): किन्हीं दो वस्तुओं के घनत्वों के अनुपात को वस्तु का आपेक्षित घनत्व कहते हैं ।
➤ आपेक्षिक घनत्व एक शुद्ध संख्या है, इसका कोई मात्रक नहीं होता है |
➤ बायल का नियम (Boyle's Law): स्थिर ताप पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का दाब उसके आयतन का व्युत्क्रमानुपाती होता है अर्थात् P x v = नियतांक ।
▪शक्ति (Power)
➤ किसी वस्तु के कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं | शक्ति वह माप है जो बताती है कि कार्य कितनी शीघ्रता या कितनी विलम्बता से किया जाता है | यदि t समय में w कार्य होता है, तो शक्ति P होगी- शक्ति = कार्य /समय या P =wt शक्ति का मात्रक वाट है । IW = I J/S
➤ मशीनों की शक्ति को अश्व शक्ति (Horse Power - HP) में भी व्यक्त किया जाता है ।
➤ वाट सेकेण्ड (ws) ऊर्जा या कार्य का मात्रक है, वाट घंटा (wh) भी ऊर्जा या कार्य का मात्रक है ।
▪पृष्ठ तनाव
➤ पृष्ठ तनाव: प्रत्येक द्रव का स्वतन्त्र पृष्ठ सिकुड़कर न्यूनतम क्षेत्रफल ग्रहण करने की प्रवृत्ति प्रदर्शित करता है । द्रवों की इस प्रवृत्ति के कारण उनका स्वतन्त्र पृष्ठ तनी हुई झिल्ली की भांति व्यवहार करता है । द्रव के स्वतन्त्र पृष्ठ पर विद्यमान इस तनाव को पृष्ठ या पृष्ठीय तनाव कहते हैं ।
➤ किसी द्रव का पृष्ठ तनाव वह बल है जो उस द्रव के पृष्ठ पर खींची गई कल्पित रेखा की एकांक लम्बाई पर रेखा के लम्बवत् तथा पृष्ठ के स्पर्श रेखावत् कार्य करता है । इसका मात्रक न्यूटन/मीटर 2 है ।
➤ द्रव का ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, और क्रांतिक ताप पर यह शून्य हो जाता है ।
➤ ससंजक बल (Cohesive Force): एक ही पदार्थ के अणुओं के बीच कार्य कारी आकर्षण बलों को ससंजक बल कहते हैं | जिन द्रवों के अणुओं के बीच ससंजक बल अधिक होता है वे बर्तन की दीवार को गीला नहीं करते हैं, जैसे - पारा पृष्ठ-तनाव का कारण ससंजक बल होता है।
➤ आसंजक बल (Adhesive Force): भिन्न-भिन्न पदार्थों के अणुओं के बीच कार्य कारी बल को आसंजक बल कहते हैं ।
✍✍✍ Sʜᴀʀᴇ जरूर करें ‼️.
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