लोक अदालत

🎓लोक अदालतें ऐसे मंच या फोरम होते हैं जहाँ मामलों का सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटारा किया जाता है। 

🎓यह सामान्य न्यायालयों से अलग होता है, क्योंकि यहाँ विवादित पक्षों के बीच परस्पर समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान किया जाता है। 

🎓लोक अदालतों का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अन्य हितधारकों के साथ मिल कर किया जाता है। 

🎓लोक अदालतों में सभी दीवानी मामले, वैवाहिक विवाद, नागरिक मामले, भूमि विवाद, मज़दूर विवाद, संपत्ति बँटवारे संबंधी विवाद, बीमा और बिजली संबंधी विवादों का निपटारा किया जाता है। 

🎓विधि के तहत ऐसे अपराध जिनमें राजीनामा नहीं हो सकता तथा ऐसे मामले जहाँ संपत्ति का मूल्य एक करोड़ रुपए से अधिक है, का निपटारा लोक अदालतों में नहीं हो सकता है। 

🎓लोक अदालत की स्थापना का सर्वप्रथम विचार भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी. एन. भगवती द्वारा दिया गया था। 

🎓सबसे पहली लोक अदालत का आयोजन वर्ष 1982 में गुजरात में किया गया था। वर्ष 2002 से लोक अदालतों को स्थायी बना दिया गया।

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