कोविड- 19 महामारी को सुरक्षा का विषय बनाया जाए

आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को ऐसे उपाय अपनाने की आवश्यकता है, जिससे इस ख़तरे से निपटने की सुरक्षा के केंद्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हो।

 इसके अलावा निर्णय लेने से लेकर उसके क्रियान्वयन का चक्र भी सुनिश्चित किया जाए।इस चुनौती का एक संभावित समाधान ये हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एक ऐसे प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास करे, जो ऐसी चुनौतियों से निपटने के नियम क़ायदे तय कर दे। साथ ही वायरस से किस देश को कितना ख़तरा है, इस आधार पर देशों का वर्गीकरण किया जाए। फिर हर देश की मदद के लिए ख़ास उपाय किए जाएं। ताकि इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट से दुनिया को उबारा जा सके।

 विभिन्न देशों के पास विशाल सैन्य शक्तियां हैं, जिन्हें इस वायरस के प्रकोप की रोकथाम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है फिर चाहे वो घरेलू स्तर पर हो या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही क्यों न हो। पिछले कुछ हफ़्तों में हमने देखा है कि भारत, अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय क्षमताओं को विश्व के सामने रखा है।

 इन देशों की सरकारें, जिस तरह अपने-अपने यहां इस वायरस के प्रकोप से निपट रही हैं, उससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि ये देश इस नई महामारी से निपटने की कितनी शक्ति रखते हैं। इसी तरह, संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाली इस महामारी का संज्ञान न ले कर ये ज़ाहिर किया है कि वैश्विक सुरक्षा के प्रशासन का मौजूदा ढांचा अब ज़्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है। आज ज़रूरत है कि सुरक्षा परिषद, उन देशों में मध्यस्थ की भूमिका निभाए, जहां युद्ध चल रहे हैं, जैसे कि लीबिया और सीरिया। और उसे चाहिए कि वो इन देशों में भी यमन से सीख लेते हुए तुरंत युद्ध विराम की घोषणा करे।

 अगर सुरक्षा परिषद ऐसा करने में नाकाम रहती है, तो ये महामारी और फैल जाएगी।क्योंकि जिन देशों में युद्ध चल रहा है वहां पर स्वास्थ्य कर्मियों और ज़रूरी सामान की आपूर्ति मुमकिन नहीं है। 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चाहिए कि वो शांति के अभियानों में लगे सुरक्षा

बलों को तुरंत टेस्ट करने वाली किट मुहैया कराए। सैनिकों की सुरक्षा के उपकरण उपलब्ध कराए। साथ ही साथ युद्ध वाले इलाक़ों में वेंटिलेटर भी पहुंचाए, ताकि संघर्ष की विभीषिका झेल रहे लोगों को तुरंत मदद मिल सके।

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाली इस महामारी का संज्ञान न ले कर ये ज़ाहिर किया है कि वैश्विक सुरक्षा के प्रशासन का मौजूदा ढांचा अब ज़्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है।

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