सोनाली मेरे पड़ोस में रहती थी। हम साथ-साथ स्कूल जाते थे। स्कूल जाते समय हमें फ़क़ीर बाबा मिलते थे। उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता था। एक दिन उन्हें गाना गाते देख हम रुक गए। उनकी आवाज़ बहुत मीठी थी । गाने का अंदाज़ भी बहुत निराला था । हमने उनसे पूछा, "क्या आप हमें भी गाना सिखा सकते हैं?" फ़क़ीर बाबा ने कहा, "ज़रूर सिखाऊँगा। मैं यहीं पुरानी मज़ार के पास रहता हूँ। अगर आप लोग गाना सीखना चाहते हैं, तो आपको रोज़ वहाँ आना होगा।" उस दिन से फ़क़ीर बाबा हमारे दोस्त और गुरु दोनों बन गए। सोनाली और मैं रोज़ उनसे गाना सीखने जाने लगे। गाँव के लोग फ़क़ीर बाबा की मदद करते थे। फ़क़ीर बाबा के साथ उनका एक कुत्ता मोती भी रहता था, जो उनकी रक्षा करता था । पाँच साल के बाद हम दोनों ने अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली। फिर सोनाली और मैं अपने-अपने परिवार के साथ शहर चले आए। आज लगभग नौ साल के बाद मैं अपने गाँव आई, फ़क़ीर बाबा से मिलने । किसी ने बताया, "पुरानी मज़ार के पास तो कोई भी नहीं रहता है। उस मज़ार के पास अब सिर्फ मोती रहता है।"
देव दीपावली ।।
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🪔 देव दीपावली पर्व उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर में दीपावली के पंद्रह दिन
पश्चात कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। गंगा नदी के किनारे रविदास घाट
से...
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