📌 बंगाल का गवर्नर-जनरल (1773-1833): जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई तो उसने ‘बंगाल के गवर्नर’ (Governor of Bengal) पद के माध्यम से बंगाल पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। बंगाल के पहले गवर्नर ‘रॉबर्ट क्लाइव’ (Robert Clive) थे।
➽ अन्य प्रेसीडेंसी, बॉम्बे एवं मद्रास के पास अपने स्वयं के गवर्नर थे।
➽ हालाँकि रेगुलेटिंग एक्ट-1773 के पारित होने के बाद ‘बंगाल के गवर्नर’ पद का नाम बदलकर ‘बंगाल का गवर्नर-जनरल’ रख दिया गया। बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings) थे।
➽ इस अधिनियम (रेगुलेटिंग एक्ट-1773) के माध्यम से बॉम्बे एवं मद्रास के गवर्नर बंगाल के गवर्नर-जनरल के अधीन कार्य किया।
📌 भारत का गवर्नर-जनरल (1833-58): चार्टर एक्ट 1833 द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल (Governor-General of Bengal) का पदनाम पुनः बदलकर ‘भारत का गवर्नर-जनरल’ (Governor-General of India) कर दिया गया। भारत के पहले गवर्नर-जनरल विलियम बैंटिक (William Bentinck) थे।
➽ यह पद मुख्य रूप से प्रशासनिक उद्देश्यों के लिये था और इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स को रिपोर्ट करना था।
📌 वायसराय (1858-1947): वर्ष 1857 के विद्रोह के बाद कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया गया और भारत ब्रिटिश ताज के सीधे नियंत्रण में आ गया।
➽ भारत सरकार अधिनियम 1858 (Government of India Act 1858) पारित हुआ जिसने भारत के गवर्नर जनरल का नाम बदलकर ‘भारत का वायसराय’ कर दिया।
➽ वायसराय को सीधे ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त किया गया था।
➽ भारत के पहले वायसराय लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning) थे।
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