चंटू और मंटू टीकमपुर में रहते थे। उनके पिता किसान थे। एक दिन वे खेत में गए। आकाश में एक जहाज़ उड़ रहा था। उनकी नज़र जहाज़ पर ही थी। चंटू ने गेंद आकाश की ओर उछाल दी। गेंद बहुत दूर जाकर गिरी। उनकी पालतू बिल्ली गेंद को पकड़ने दौड़ी। कुछ देर बाद चंटू और मंदू को ख़्याल आया कि बिल्ली आखिर है कहाँ? वे दौड़कर उस ओर गए। जब पास पहुँचे तो पता चला कि बिल्ली एक फन वाले ज़हरीले साँप के साथ लड़ रही है। चंटू ने एक पत्थर उठा लिया, लेकिन मंटू ने उसे मना किया और बिल्ली को अपने पास बुला लिया। चंटू बोल उठा, "अरे! वह साँप कहीं जाकर छिप गया है। उसे मार देना चाहिए था ।" मंटू बोला, "नहीं, साँप तो हमारी फसलों को नुकसान होने से बचाते हैं।" तब चंटू को ध्यान आया। वह बोला, "अरे हाँ! मैं तो भूल ही गया था कि साँप चूहों को खाकर हमारी मदद करते हैं।" अब चंटू और मंटू प्यार से अपनी बिल्ली के साथ खेलने लगे।
जती स्वरूप का रहस्य ।।
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🥗हनुमान जी और लक्ष्मण जी को 'जती' (यति) की उपमा मिलना मात्र एक अलंकार नहीं
है, बल्कि यह उनके अंतस की उस गहरी अवस्था का संकेत है जहाँ ऊर्जा खंडित नहीं
होती...
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