सपनों की उड़ान ।।

रूही के स्कूल में गर्मियों की छुट्टियाँ पड़ गई थीं। रूही बहुत खुश थी। उसकी मौसी मुंबई में रहती थीं। रूही अपने परिवार के साथ हवाई जहाज़ से मुंबई जाने वाली थी । सारी तैयारियाँ हो चुकी थीं। रूही बहुत खुश थी। वह पहली बार हवाई यात्रा करने जा रही थी। माँ ने कहा, "रूही, सो जाओ। सुबह जल्दी जाना है ।" रूही को रात में सपना आया। उसने देखा कि वह हवाई जहाज़ में बैठी हुई है। जहाज़ उड़ने की तैयारी में है। उसने धीरे-धीरे चलना शुरू किया। फिर तेज़ी से दौड़ने लगा। तेज़ आवाज़ कानों में गूंजने लगी । जहाज़ उड़ान भरने ही वाला था कि अचानक ज़ोर का झटका लगा। वह हड़बड़ाकर उठ बैठी । सामने माँ खड़ी थीं वह रूही को जगा रही थी, "चलो रूही, जल्दी उठो जाना है कि नहीं ? " रूही आँखें मलते हुए बोली, "क्या हम जहाज़ में बैठ गए ?"

माँ ने हँसते हुए कहा, "सपनों की उड़ान छोड़ो। असली दुनिया की उड़ान अब भरनी है।" रूही उठी और मुँह-हाथ धोने चली गई ।

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